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आदर्श रोड; पौने दो किमी में 90 से ज्यादा गड्‌ढे

3 वर्ष पहले
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पौने दो किमी लंबी ऊबड़-खाबड़ जेके रोड। 90 से ज्यादा छोटे-बड़े गड्‌ढे। मार्च 2011 में इसे आदर्श रोड बनाने की न केवल घोषणा हुई, बल्कि 12 करोड़ रुपए भी खर्च कर दिए गए। हकीकत यह है कि जेके रोड की दोनों सड़कों पर छोटे-बड़े 90 से ज्यादा गड्‌ढे हैं। इसमें से रायसेन रोड से मिनाल की ओर वाली सड़क पर 52 तो दूसरी तरफ 38 से ज्यादा गड्‌ढे हैं। हर काम के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किए गए थे। खास बात यह है कि 1 करोड़ 60 लाख रुपए से सौंदर्यीकरण सबसे पहले कर दिया गया। वहीं 60-60 लाख रुपए से दोनों तरफ पेविंग ब्लॉक भी सड़क बनने के पहले लगा दिए गए। नतीजा, सड़क बनते समय पेबिंग ब्लॉक मिट्‌टी में दब गए। इस रोड को मुख्यमंत्री अद्योसंरचना निधि से 2013 में 1 करोड़ 30 लाख रुपए और दूसरी बार में 1 करोड़ 90 लाख रुपए की राशि मिल चुकी है।

मार्च 2011 में भूमिपूजन, सात साल में Rs.12 करोड़ खर्च, फिर भी आदर्श नहीं बन पाई सड़क



85% काम ही नहीं हुआ, और पेमेंट पूरा हो गया

जब आदर्श मार्ग बनाने का काम शुरू हुआ था उस समय के पार्षद गिरीश शर्मा के अनुसार जेके रोड के निर्माण पर पैसों की बंदरबांट हुई है। 85% काम हुआ ही नहीं, जिसका पेमेंट हो गया। काम करने वाले वही लोग थे, जिन्होंने प्लानिंग की थी। वे लोग तत्कालीन महापौर के आगे पीछे घूमते रहते थे और आज भी घूम रहे हैं।

दोनों के तर्क... तत्कालीन और वर्तमान महापौर आमने-सामने

मेरे कार्यकाल में इस रोड को आदर्श बनाने का काम लगातार चल रहा था, लेकिन उसके बाद काम रोक दिया गया। इसके लिए हर साल के बजट में राशि आवंटित करने का प्रावधान था। - कृष्णा गौर, पूर्व महापौर

30 लाख रुपए से सड़क के दोनों तरफ लगाए गए पेविंग ब्लॉक अब गायब हो चुके हैं।

1.60 करोड़ से पेड़-पौधे व दीवार पर कलाकृति बनाई गई थीं, जो अब ढूंढे से भी दिखाई नहीं देतीं।

2 करोड़ रुपए से 100 मीटर सड़क पर सीमेंट कंक्रीट का काम हुआ, जो अब पूरी तरह से उखड़ चुका है।

रोड की बदहाली के लिए पर्दे के पीछे की कहानी

जेके रोड को आदर्श मार्ग बनाने के लिए पूर्व महापौर कृष्णा गौर ने बजट में इसकी व्यवस्था की थी। इसमें तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने पैसे की कमी नहीं होने दी, लेकिन काम को गति नहीं मिली। राजनीतिक चर्चा के अनुसार वर्तमान महापौर आलोक शर्मा और कृष्णा गौर दोनों ही गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र में खास दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अंदरखाने की खबर है कि कृष्णा गौर के कार्यकाल के इस प्रोजेक्ट को जांच के घेरे में लेकर काम रुकवा दिया गया है। साथ ही हर साल मेंटेनेंस के लिए बजट में 3 करोड़ रुपए रखे जाने के प्रावधान को भी समाप्त कर दिया गया है। इस विधानसभा क्षेत्र में पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष तपन भैमिक का भी नाम है, जो आलोक शर्मा के करीबी और बाबूलाल गौर से दूरी बनाने वाले खेमे के होने के कारण चर्चा में हैं। यानी जेके रोड सिर्फ इसलिए आदर्श रोड नहीं बन पा रही है, क्योंकि इस प्रोजेक्ट में राजनीतिक लालसाएं आडे आ रही हैं।

यह सड़क मेरे कार्यकाल में नहीं बनी। पहले सड़क को लेकर क्या प्लानिंग थी और किस तरह से पैसे खर्च किए गए इसकी जानकारी मुझे कभी मिली ही नहीं। - आलोक शर्मा, महापौर

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