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बेनामीदार की प्रॉपर्टी नाम कराने वालों की रजिस्ट्री करें निरस्त

3 वर्ष पहले
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जल्द ही बेनामीदार के नाम प्रॉपर्टी खरीदकर उसे अपने नाम कराने वाली सभी रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दी जाएंगी। आयकर विभाग के बेनामी विंग ने भोपाल समेत उन जिलों के कलेक्टर्स को पत्र लिखा है, जहां पिछले 8 माह के दौरान बेनामी प्रॉपर्टी सामने आईं थी। जुलाई से लेकर अप्रैल तक आयकर विभाग ने प्रदेश में करीब 220 प्रॉपर्टी अटैच की थीं। इनमें से ज्यादातर की 90 दिन की प्रोविजनल अटैचमेंट की अवधि खत्म हो गई है। विभाग ने इन अटैचमेंट को स्थाई करने के लिए दिल्ली स्थित विभाग को ऑर्डर भेज दिया है। विभाग का कहना है कि विभागीय अटैचमेंट की प्रक्रिया नियमानुसार चलती रहेगी। अटैचमेंट की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद प्रॉपर्टी का स्वामित्व केंद्र सरकार के पास आ जाएगा। बेनामी एक्ट की धारा 6 (2) के अनुसार अगर किसी व्यक्ति ने किसी बेनामीदार के नाम जमीन-घर खरीदा और बाद में उसे अपने नाम करा लिया है तो ऐसी सभी प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए की गई रजिस्ट्री शून्य की जा सकती है। विभाग ने कहा है कि यह तमाम रजिस्ट्री जिला प्रशासन के संज्ञान में होती हैं। इसलिए उनके पास यह अधिकार है कि वे इसे शून्य घोषित कर दें।

मध्यप्रदेश में 220 से ज्यादा प्रॉपर्टी आयकर विभाग ने की हैं अटैच

हो सकता है तत्काल निर्णय

केजेएस सीमेंट के मालिक पवन अहलूवालिया ने नौकर कोल के नाम 40 एकड़ जमीन खरीदी थी। बाद में उसे अपने नाम करा ली। मामला एसटी लैंड का था, तो कलेक्टर ने दो शर्तों पर रजिस्ट्री की अनुमति दी थी। पहली, पैसे तत्काल कोल के खाते में जमा हों। दूसरी, 6 माह में कोल 40 एकड़ जमीन खरीद ले, लेकिन रजिस्ट्री में जिन चैक से भुगतान बताया गया, वह कभी कैश ही नहीं हुए।

महेंद्र चौधरी ने 2000 में कोलार में धीरू गौड़ के नाम से 3 एकड़ जमीन खरीदी। जमीन का वर्तमान मूल्य छह करोड़ से ज्यादा है। एक अन्य व्यक्ति ने स्वयं को धीरू गौड़ बताकर जमीन का स्वामित्व मांगा। जवाब में चौधरी ने कहा दावा करने वाला फर्जी है। वास्तविक धीरू गौड़ उनका नौकर है। जांच में धीरू गौड़ एक काल्पनिक नाम निकला।

अटैचमेंट पर अंतिम निर्णय होने तक जमीन का स्वामित्व भूस्वामी के पास

आयकर विभाग बेनामी प्रॉपर्टी का 90 दिन का प्रोविजनल अटैचमेंट करता है। भू-स्वामी को नोटिस देकर जवाब मांगा जाता है। जवाब संतोषप्रद न होने पर ऑर्डर दिल्ली स्थित उच्चस्थ विभाग को भेजकर उसे स्थाई करने की अपील की जाती है। विभाग के दावे की पड़ताल होती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान जमीन का स्वामित्व भू-स्वामी के पास रहता है, लेकिन इसे खरीद-बेच नहीं सकता। जरूरत के हिसाब से कंस्ट्रक्शन करवाने स्वतंत्र रहता है।

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