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संविधान चाहे जितना अच्छा हो, लेकिन इस पर अमल कराने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो इसका कोई लाभ देश और नागरिकों को नहीं मिलेगा

3 वर्ष पहले
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देश के भावी चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई रविवार को राजधानी में थे। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में मप्र हाईकोर्ट के भूतपूर्व चीफ जस्टिस की जीपी सिंह की याद में आयोजित व्याख्यान समारोह में जस्टिस गोगोई ने संवैधानिक नीति-निर्देश: पहले और अब, भविष्य की दृष्टि से, विषय पर अपने विचार कानून के विद्यार्थियों के साथ साझा किए।

भास्कर ख़ास

नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी में डॉ. भीमराव अांबेडकर का हवाला देकर बोले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई-

जिस पीढ़ी ने संविधान तैयार किया था, वैसी सामर्थ्यवान लीडरशिप दोबारा देश में आई ही नहीं

हमारा संविधान चाहे जिनता अच्छा हो, लेकिन इस पर अमल कराने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे तो इसका कोई लाभ देश और नागरिकों को नहीं मिल सकता। डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान सभा की बैठक में यही आखिरी शब्द थे। संयोग से उनकी 127वीं जयंती के दूसरे दिन ही हम इस विषय पर बात कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार अपने आदेश और निर्देशों में इसे दोहराया है। देश की आम जनता को इसे समझना और आत्मसात करना होगा। डॉ. आंबेडकर ने कहा था कि \\\"भविष्य में हम अपनी आजादी को बरकरार रख पाएंगे या खो देंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हम अपने संवैधानिक दायित्वों को कितना पूरा कर पाते हैं और राजनीतिक लोकतंत्र को कितना सामाजिक लोकतंत्र में बदल पाते हैं। हमारी आजादी का एक ही दुश्मन है, वह है असमानता। चाहे वो जातिगत हो, आर्थिक या सामाजिक। यदि हमने इन्हें दूर नहीं किया तो एक दिन ऐसा आएगा जब हम अपनी आजादी खो बैठेंगे।\\\' चिंता इस बात की है कि हमारे देश की राजनीतिक ताकतें आज क्या कर रही हैं? इस पर विचार कीजिए, सोचिए। भविष्य में आप (नई पीढ़ी) पर निर्भर करेगा कि आप इस आजादी को बरकरार रख पाते हैं, उसे और समृद्ध करना चाहते हैं या फिर खो देना चाहेंगे। वक्त के साथ-साथ राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक हालात बदलते रहेंगे, लेकिन कुछ नहीं बदलेगा तो वह है संविधान से हमें मिलने वाले नीति- निर्देश। भले ही सबकुछ बदल जाए लेकिन जो अक्षुण्य रहना चाहिए वह है हमारा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्य। कानून के विद्यार्थियों की यह जिम्मेदारी कि वे इसकी गंभीरता को समझें। क्योंकि आप ही संविधान के नीति-निर्देशों के अभिरक्षक (कस्टोडियन) हैं। जिस पीढ़ी ने संविधान तैयार किया था, वैसी सामर्थ्यवान लीडरशिप दोबारा देश में आई ही नहीं, भविष्य में भी एेसी संभावना नजर नहीं आती है, लेकिन युवा पीढ़ी में उम्मीद की किरण बरकरार है।

ये भी थे मौजूद... इस अवसर पर असम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अजीत सिंह, मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता, लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता, मप्र हाईकोर्ट के जज जेके महेश्वरी, जस्टिस एससी शर्मा, जस्टिस आलोक अराधे, रजिस्ट्रार जनरल मो. फहीम अनवर, प्रमुख सचिव लॉ एएम सक्सेना, राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, महाधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव, एनएलआईयू के डायरेक्टर प्रो. मुकेश श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार गिरिबाला सिंह समेत कई न्यायधीश और न्यायिक अधिकारी मौजूद थे।

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