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नलों में 24 घंटे सप्लाई नहीं, ऐसे में हवा के दबाव से ही बढ़ती रहती है मीटर रीडिंग
जेएनएनयूआरएम के तहत शहर में 24x7 पानी सप्लाई के वादे के साथ 22 करोड़ रुपए खर्च करके खरीदे गए मीटर बेमानी साबित हो रहे हैं। नलों में पानी आने से पहले हवा के दबाव से इन मीटर की रीडिंग आगे बढ़ जाती है। दिन भर भी मीटर धीरे- धीरे घूमता रहता है, जबकि पानी सप्लाई केवल आधा घंटा ही होती है। यही नहीं, अब तक शहर में लगाए गए डेढ़ लाख मीटरों में से 15 प्रतिशत यानि 22 हजार 500 तो खराब हो गए हैं और 25 प्रतिशत यानि 37 हजार 500 मीटर चोरी चले गए हैं। यानि केवल 90 हजार घरों में ही मीटर चालू हालत में हैं। ऐसे में मीटर रीडिंग के आधार पर सही बिल जारी होने को लेकर आशंका जताई जा रहीं हैं। करीब दो साल पहले भेल क्षेत्र में मीटर रीडिंग के आधार पर पानी के बिल जारी करने की शुरुआत हुई थी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत जिस एजेंसी को यह काम सौंपा गया था उसका कांट्रेक्टर 8 महीने पहले समाप्त हो गया और तब से एवरेज बिल जारी किए जा रहे हैं। हाल ही में नगर निगम ने नई एजेंसी को यह काम सौंपा है। यह सर्वे शुरू करने की तैयारी कर रही है।
जेएनएनयूआरएम के तहत 22 करोड़ रुपए खर्च करके खरीदे गए थे मीटर
30 मिनट से लेकर एक घंटे तक होती है सप्लाई
शहर में नगर निगम 30 मिनट से लेकर एक घंटे तक पानी सप्लाई करता है। ऐसे में कम से कम 23 घंटे तक पानी की लाइन खाली रहती है। नल में पानी आने से ठीक पहले हवा के दबाव के कारण भी रीडिंग आगे बढ़ जाती है। वैशाली नगर में रहने वाले आरके यादव ने बताया कि वे रोजाना मीटर की रीडिंग को पानी आने से पहले आगे बढ़ता हुआ देखते हैं। माचना कॉलोनी के लोगों ने भी इसी तरह की शिकायत की है।
सरकारी मकानों के बाहर से गायब
शिवाजी नगर, तुलसी नगर, माता मंदिर व अन्य क्षेत्रों में सरकारी मकानों के बाहर लगे ज्यादातर मीटर गायब हो गए हैं। इन मकानों के पीछे गलियों में चैंबर बनाकर मीटर लगाए गए थे। लेकिन चोरों ने इनके ताले तोड़ कर मीटर गायब कर दिए। भास्कर संवाददाता ने इस क्षेत्र में जितने भी चैंबर चैक किए एक में भी मीटर नहीं मिला। इसके अलावा साकेत नगर, शक्ति नगर, अशोका गार्डन व अरेरा कॉलोनी जैसे इलाकों में भी मीटर चोरी हुए हैं।
अभी एजेंसी को सर्वे का काम करना है। इसमें चोरी और खराब मीटर आदि का अाधिकारिक आंकड़ा भी सामने आ जाएगा। एक संभावना यह भी है कि उपभोक्ताओं ने मीटर निकाल कर रख लिए हों, क्योंकि सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उपभोक्ता की है। हवा के दबाव से मीटर रीडिंग बढ़ने जैसी शिकायतों की भी जांच कराएंगे। जब तक पूरी व्यवस्था नहीं बन जाएगी एवरेज बिल ही जारी होंगे। -एमपी सिंह, अपर आयुक्त, नगर निगम
खराबी की वजह
24 घंटे सप्लाई नहीं होने से मीटर लगाने के बाद पानी का प्रेशर कम हो जाता है। जब पानी नहीं मिला तो लोगों ने मीटर के आगे मोटर लगा दी। प्रेशर बढ़ने पर मीटर इसे सहन नहीं कर पाए और खराब हो गए।
दिल्ली में पसंदीदा मीटर लगवाने व जांच कराने जैसी कई सुविधाएं
दिल्ली में पिछले कई सालों से दिल्ली जलबोर्ड ज्यादातर क्षेत्रों में 24x7 पानी सप्लाई कर रहा है और वहां मीटर भी लगे हैं। लेकिन यह पूरी व्यवस्था दिल्ली जलबोर्ड अधिनियम से संचालित होती है और बोर्ड समय-समय पर टैरिफ तय करता है। यहां उपभोक्ता अपनी पसंद की कंपनी का मीटर लगवा सकते हैं। खराब होने की आशंका पर मीटर की जांच भी करा सकते हैं। इनकी सुरक्षा उपभोक्ता की जिम्मेदारी है लेकिन वह अपनी पसंद के ऐसे स्थान पर मीटर लगवा सकता है, जहां से रीडिंग में परेशानी न हो। रीडिंग दर्ज कराने के लिए वे मीटर का फोटो एप पर भेज सकते हैं।
24x7 सप्लाई में ही सफल हैं मीटर
पानी के मीटर वहीं सफल हो सकते हैं, जहां 24 घंटे सप्लाई हो। जब आप एक निश्चित समय के लिए पानी सप्लाई कर रहे हैं तो मीटर लगाकर नापने की जरूरत नहीं है। सप्लाई के समय और पाइप के डायमीटर से ही इसकी गणना हो जाती है। मीटर लगने से पानी का प्रेशर कम हो रहा है। - बीके श्रीवास्तव, पूर्व चीफ इंजीनियर, पीएचई विभाग