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कैब-टैक्सी और ई-रिक्शा चलाने के लिए अलग से कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत नहीं

3 वर्ष पहले
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प्रदेश में कैब-टैक्सी और ई-रिक्शा चालन के लिए अब अलग से कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस (एलटीवी) लेने की जरूरत नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने लाइट मोटर व्हीकल की श्रेणी में आने वाले वाहनों के व्यावसायिक परिचालन की स्थिति में अलग से कमर्शियल ट्रांसपोर्ट व्हीकल श्रेणी के ड्राइविंग लाइसेंस की बाध्यता खत्म कर चुका है। शीर्ष अदालत के आदेश का पालन कराने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मप्र राज्य परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन आयुक्त और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में संशोधन करने को कहा है। मप्र परिवहन विभाग के मुताबिक जल्द ही ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में संशोधन किए जाएंगे।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने नियमों में संशोधन करने मप्र के परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, परिवहन आयुक्त, डीजीपी को लिखा पत्र

वर्तमान में मध्यप्रदेश में जारी होते हैं पांच तरह के डीएल

इन्हें मिलेगी लाइसेंस से छूट

मोटर साइकिल विदआउट गिअर

मोटर साइकिल विद गियर

लाइट मोटर व्हीकल (गुड्स या पैसेेंजर)

ई-रिक्शा या ई-कार्ट

1. लाइट मोटर व्हीकल (एलएमवी) 2. लाइट मोटर व्हीकल ट्रांसपोर्ट (एलटीवी) कमर्शियल 3. मीडियम गेज व्हीकल और पैसेंजर व्हीकल (एमजीवी और पीएसवी 4. हैवीवेट गुड्स (ट्रांसपोर्ट) व्हीकल (एचटीवी) 5. इम्पोर्टेट मोटर व्हीकल (आईएमवी)

बीमा क्लेम खारिज होने की वजह से बढ़ा था ड्राइविंग लाइसेंस विवाद

कैब-टैक्सी के एक्सीडेंट होने की दशा में कमर्शियल लाइसेंस न होने के कारण बीमा क्लेम के प्रकरणों में वाहन का बीमा होते हुए भी यात्री और वाहन मालिक को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा था। बीमा कंपनियां क्लेम प्रकरणों को खारिज करने के लिए इसका काफी दुरुपयोग भी कर रही थीं। इस कारण हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक में अपीलों की संख्या बढ़ रही थी।

लाइट मोटर व्हीकल: मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 2 (21) के अनुसार ऐसे वाहन जिनका भार 7500 किलोग्राम या 7.5 टन से ज्यादा नहीं होता है, वे लाइट मोटर व्हीकल की श्रेणी में आते हैं।

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ओर से जारी किया गया पत्र आज ही हमें मिला है। इसके पालन के लिए आदेश जारी किए जा रहे हैं। - शैलेंद्र श्रीवास्तव, परिवहन आयुक्त

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