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अशोका गार्डन, बागसेवनिया व मिसरोद में बनेंगे आरोग्य केंद्र, ताकि अस्पतालों में कम हो लोड

3 वर्ष पहले
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अशोका गार्डन, बागसेवनिया और मिसरोद स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) को स्वास्थ्य विभाग मप्र आरोग्यम केंद्र में अपग्रेड करेगा। तीनों ही अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने के लिए मेडिकल ऑफिसरों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि अस्पताल में ओपीडी के बाद पहुंचने वाले मरीजों को भी इलाज मिल सके। यहां मरीज 19 प्रकार की पैथोलॉजिकल जांच भी करा सकेंगे। इसके लिए नेशनल हेल्थ मिशन के तहत चार साल पहले शुरू की गई नि:शुल्क पैथोलॉजी जांच योजना को अब शहरी आरोग्य केंद्र योजना के नाम से शुरू किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह फैसला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों में सामान्य बीमारियों के मरीजों की बढ़ती भीड़ को कम करने लिया है।

जिला अस्पतालों में पहुंच रहे सामान्य बीमारी वाले मरीज भी

नेशनल हेल्थ मिशन के अफसरों ने बताया कि जिला अस्पतालों की ओपीडी में सर्दी, खांसी व बुखार के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। इससे जिला अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ तेजी से बढ़ रही है। जबकि इन अस्पतालों में पहुंचे 20 फीसदी मरीजों की बीमारी का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध है। लेकिन, यहां मरीजों की बीमारी की पहचान में मददगार साबित होने वाली जरूरी मेडिकल जांचें नहीं होती। इसकी वजह अस्पतालों की पैथोलॉजी में लैब टेक्नीशियन की कमी होना थी। इस समस्या का निराकरण करने शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को आरोग्य केंद्रों में अपग्रेड किया जा रहा है।

सेंटर के लिए मिला 2 लाख का बजट

एनएचएम के मिशन संचालक एस विश्वनाथन ने बताया कि ड्रग एंड कंज्यूमेबल्स के लिए इस साल प्रत्येक प्राइमरी हेल्थ सेंटर को 2 लाख रुपए का बजट दिया है। इसी से यहां मरीजों की 19 प्रकार की जांचें की जाएंगी। यह व्यवस्था दो सप्ताह के भीतर शुरू कर दी जाएगी।

अभी जेपी और हमीदिया होते हैं रैफर

अशोका गार्डन, मिसरोद और बागसेवनिया के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओपीडी में अभी रोजाना आैसतन 1500 मरीज पहुंचते हैं। यहां 19 जांचों में से आधी ही हो रही हंै। इससे इन इलाकों के मरीज हमीदिया, जेपी व निजी अस्पताल में इलाज कराने रैफर हो जाते हैं।

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