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कंप्यूटर साइंस में पहली बार बनाए असि. प्रोफेसर के पद

3 वर्ष पहले
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नए शिक्षण सत्र 2018-19 से उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 44 नए सरकारी कॉलेज खोले जा रहे हैं। इन कॉलेजों के साथ नई बात यह है कि यहां कम्प्यूटर साइंस विषय के लिए रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद तैयार किए गए हैं। प्रदेश सरकार ने कंप्यूटर साइंस विषय के लिए पहली बार 63 पोस्ट क्रिएट की हैंं। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स, मैनेजमेंट, बॉयोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबॉयोलॉजी आदि अन्य एलाइड सब्जेक्ट में पोस्ट क्रिएट करने की मांग उठी है, क्योंकि इन विषयों में स्टूडेंट्स एडमिशन लेने के लिए अधिक रुचि दिखाते हैं, लेकिन इनमें सब्जेक्ट एक्सपर्ट के तौर पर रेगुलर फैकल्टी नहीं मिलती।

अन्य कॉलेजों में भी बने पोस्ट

कंप्यूटर साइंस विषय के अतिथि विद्वान डॉ. रामवीर सिंह का कहना है कि क्या कंप्यूटर साइंस विषय की उपयोगिता सिर्फ नए कॉलेजों में ही है। पहले से संचालित कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी क्या इस तरह का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश में 457 सरकारी कॉलेज पहले से ही संचालित हैं। इनमें करीब 50 हजार स्टूडेंट्स कम्प्यूटर विषय की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा आर्ट्स संकाय के छात्रों को भी कम्प्यूटर एप्लीकेशन के तौर पर यह विषय पढ़ाया जा रहा है।

आधार पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषय

बीए, बीएससी और बीकॉम फाइनल ईयर में आधार पाठ्यक्रम में कंप्यूटर एप्लीकेशन विषय अनिवार्य विषय के रूप में होने के बावजूद अब तक सरकार द्वारा कम्प्यूटर साइंस विषय पढ़ाने की नियमित व्यवस्था नहीं की गई है। साइंस ग्रुप के हर पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में भी कम्प्यूटर पढ़ाया जा रहा है।

जनभागीदारी से नियुक्त करते हैं अतिथि विद्वान

कंप्यूटर साइंस में बीएससी व एमएससी जैसे कोर्स संचालित होते हैं। वहीं बीसीए के अलावा बीकॉम व बीए में कम्प्यूटर एप्लीकेशन के साथ पढ़ाई कराई जा रही है, जिन्हें पढ़ाने के लिए जनभागीदारी से अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की जाती है।

रेगुलर फैकल्टी के अभाव में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है

कम्प्यूटर साइंस के लिए रेगुलर पदों का सृजन करना अच्छा निर्णय है। जनरल अवेयरनेस के लिए यह विषय अनिवार्य है। रेगुलर फैकल्टी के अभाव में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। जब सरकार इनसे संबंधित कोर्स को खोलने की अनुमति देती है तो हर कॉलेज में इस विषय के लिए रेगुलर पद होने चाहिए। अन्य विषयों में भी पद निर्माण के लिए शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। - डॉ. केएम जैन, पूर्व संयुक्त संचालक, उच्च शिक्षा

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