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दो साल में 13 हजार घट गई बीई में एडमिशन की संख्या

3 वर्ष पहले
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तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा सत्र 2018-19 के लिए बीटेक सहित अन्य कोर्स में 15 जून से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। इस बात को लेकर बुधवार को राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कॉलेज संचालकों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित की गई। जिसमें बीई कोर्स में एडमिशन की संख्या में लगातार आ रही कमी की चिंता दिखाई दी। बीई कोर्स में ही दो साल में एडमिशन की संख्या में 13 हजार की कमी आई है।

सत्र 2015-16 में 45 हजार 999 एडमिशन हुए थे जो सत्र 2017-18 में घटकर 32 हजार 943 रह गए। इसके लिए कॉलेजों ने काउंसलिंग प्रक्रिया व सरकारी नीतियों को दोषी बताया। कॉलेज संचालकों ने कहा कि बार बैठकें बुलाई जाती है लेकिन उनके दिए सुझावों पर एक्शन नहीं होता। जबकि वे प्राइवेट कॉलेज शिक्षा जगत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इस दौरान तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल व आरजीपीवी के कुलपति प्रो. सुनील कुमार भी मौजूद थे।

कॉलेजों की समस्या

पर पीएस के जवाब

ओबीसी के छात्रों को फीस कमेटी द्वारा तय फीस के बराबर स्कॉलरशिप देने का प्रस्ताव है। लेकिन इसके वितरण की व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता। कॉलेज के खाते में स्कॉलरशिप आने से वे इसका गलत फायदा उठा रहे थे।

सरकार के पास भी खजाना सीमित है। इसलिए कुछ शर्तें शामिल की गईं थी। बीई के लिए जेईई रैंक की शर्त में बदलाव किया गया है। अब डेढ़ लाख रैंक तक लाने वाले छात्रों को मुख्यमंत्री मेधावी योजना का लाभ मिलेगा।

पीईटी क्यों बंद की गई। इस विषय पर चर्चा की जाएगी। साथ ही यह देखा जाएगा कि जेईई के परीक्षा केंद्रों में बढ़ोतरी हो ताकि अधिक से अधिक छात्र इसमें शामिल हो सके।











कौन-कब एडमिशन दे रहा है। इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। यदि कॉलेज की ब्रांड वैल्यू है और वे नियमों का पालन करते हैं तो उनमें छात्र एडमिशन के लिए इंतजार करेंगे। अन्य छात्रों को एडमिशन देकर एक बार बेवकूफ बना सकते हैं, बार-बार नहीं।



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