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जवाहर बाग: 1980 में थे 8 हजार पेड़, बचे हैं सिर्फ 450

3 वर्ष पहले
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गोविंदपुरा के जवाहर बाग में 38 साल पहले भेल के उद्यानिकी विभाग ने आम के 10 हजार पौधे लगाए थे। इनमें से 8 हजार पौधे पेड़ बनकर फल देने लगे थे। 100 एकड़ में फैले आम के इस बड़े बाग में देखरेख के अभाव में अब सिर्फ 450 पेड़ ही बचे हैं। हालात यह हैं कि हर साल 200 से ज्यादा पेड़ नष्ट हो रहे हैं। यही हालत रही तो अगले दो साल में यह बाग पूरी तरह खत्म हो जाएगा। उद्यान विशेषज्ञों के अनुसार आम के मौसम में ठेका देकर भेल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है। बारिश के पहले जमीन को खोदकर पेड़ों के आसपास गुड़ाई की जानी चाहिए, वह भी नहीं हो रही है।

नई वैरायटी का प्रयास

भेल के उद्यान विशेषज्ञ के अनुसार जवाहर आम बाग में दशहरी, तोतापरी, लंगड़ा और नीलम आम के पौधों को आपस में क्रास कराकर नई वैरायटी बनाने का प्रयास किया गया। इसमें पहलीबार में ही सफलता मिल गई। उस दौरान भेल टाउनशिप में 22 हजार कर्मचारी कारखाने में काम करते थे।

जवाहर आम बाग की देखरेख पर भेल प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। यदि बचे हुए पेड़ों की सही ढंग से देखभाल की जाए तो आम बाग को बचाया जा सकता है। एके भट्‌टाचार्य, पूर्व नगर प्रशासक व उद्यान विशेषज्ञ

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