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अब संत नर्मदानंद ने भी छोड़ा राज्यमंत्री का दर्जा

3 वर्ष पहले
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दो सप्ताह पहले सरकार द्वारा राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजे गए संत नर्मदानंद ने इसे छोड़ दिया है। एक निजी कार्यक्रम में भोपाल आए संत नर्मदानंद ने कहा कि मैं राज्यमंत्री का दर्जा तत्काल छोड़ रहा हूं। उन्होंने भास्कर को बताया कि मैं अपनी बात पर कायम हूं। अभी मैंने सरकार को इस विषय में लिखकर नहीं भेजा है और न ही सरकार ने किसी स्तर पर मुझसे बात की है। इसी कार्यक्रम में मौजूद भय्यू महाराज ने भी दोहराया कि मैं राज्यमंत्री का दर्जा नहीं लूंगा। शेष | पेज 15 पर





नर्मदानंद और भय्यू महाराज के समिति में बने रहने पर भी संशय बन हुआ है। बाबा हरिहरानंदजी पहले ही कह चुके हैं कि समिति में लेने और मंत्री का दर्जा देने के पहले मुझसे पूछा तक नहीं गया। गौरतलब है कि सरकार ने नर्मदा घोटाला रथ यात्रा को रोकने के लिए पौधरोपण और स्वच्छता के लिए 3 अप्रैल को विशेष समिति बनाकर 5 बाबाओं को राज्यमंत्री दर्जे से नवाजा था। सात सदस्यीय समिति में बाबा नर्मदानंदजी, हरिहरानंदजी, कंप्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पं. योगेंद्र महंत भी सदस्य हैं।

विवादों से नाता

नेत्रहीन होने का दावा कर संत नर्मदानंद सालों तक रेलवे के रियायती पास पर सफर करते रहे। जब बाबा की हकीकत उजागर हुई तो उन्होंने सफाई दी थी कि नर्मदा िकनारे नंगे पांव चलने से आंखों की रोशनी लौट आई है।

यह है मामला : कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत ने साधु-संतों की टोली के साथ नर्मदा घोटाला रथ यात्रा िनकालने का ऐलान किया था। 6.67 करोड़ पौधों की गिनती कर हकीकत सामने लाने का दावा भी किया था। इस घोषणा के तीन दिन बाद ही सरकार ने विशेष समिति गठित कर 5 बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया था।

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