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एलएचबी कोच मेंटेनेंस के लिए वाॅशिंग साइडिंग पिट बनाने का काम शुक्रवार से
ट्रांसपोर्ट रिपोर्टर | भोपाल
हबीबगंज स्थित कोचिंग डिपो में बनाई जाने वाली एलएचबी वाशिंग साइडिंग पिट के निर्माण के लिए नपती का काम पूरा कर लिया गया है। शुक्रवार से इसका निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। यह बनने से राजधानी के यात्रियों को नई ट्रेनें मिलने में काफी आसानी हो सकेगी। अभी तक जर्मन टेक्नोलॉजी के एलएचबी यानी लिंकमैन हॉफ बोश तकनीक के कोच सीधे तौर पर भोपाल में मेंटेन नहीं हो पाते, इस वजह से करीब 12 करोड़ रुपए की लागत से इसका निर्माण करवाया जा रहा है। करीब छह से आठ महीने के दौरान इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। यह काम इसी सप्ताह में शुरू होने की बात अधिकारी कर रहे हैं। डीआरएम शोभन चौधुरी का कहना है कि अभी तक एलएचबी कोच के लिए कोई साइडिंग नहीं थी, इसलिए यह निर्माण करवा रहे हैं। वर्तमान में भोपाल स्टेशन पर मौजूद वाशिंग साइडिंग पिट में एलएचबी कोच का मेंटेनेंस नहीं हो पाता। वहीं, हबीबगंज में भी इस तकनीक के कोच को अलग-अलग कर एक बार में एक से लेकर अधिकतम तीन या चार का मेंटेनेंस हो सकता है। पूरे 22 या 24 कोच के एलएचबी रैक का एक साथ मेंटेनेंस हो सके, इसके लिए हबीबगंज के कोचिंग डिपो की खाली जगह का उपयोग कर साइडिंग का निर्माण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में शताब्दी के अलावा भोपाल एक्सप्रेस, रेवांचल सहित कुछ अन्य गाड़ियों में एलएचबी कोच लगा दिए जाएंगे। इनका मेंटेनेंस रैक सहित हो सके, उसके लिए एलएचबी वाशिंग साइडिंग पिट जरूरी है।
इसलिए जरूरी
रेलवे ने अगले तीन साल के दौरान सभी मंडलों से चलने वाली मुख्य ट्रेनों में एलएचबी टेक्नोलॉजी के कोच लगाने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया है कि अब जो भी नई ट्रेनें चलाई जाएंगी, उनमें भी इसी टेक्नोलॉजी के कोच लगाए जाएंगे। इसको देखते हुए हबीबगंज सहित विभिन्न रेल मंडलों के कोचिंग डिपो में नई मेंटेनेंस वाशिंग साइडिंग पिट एलएचबी बनाई जाने वाली हैं। इस कड़ी में हबीबगंज में ऐसी साइडिंग का निर्माण शुरू किया जा रहा है। टेंडर सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्राइवेट फर्म ने नपती सहित अन्य कार्य भी पूरे कर लिए हैं।