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पीने का पानी नहीं, खाना भी पसंद का नहीं मिलता

3 वर्ष पहले
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बीयू के इंदिरा गांधी हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं मंगलवार को कुलपति कक्ष का घेराव करने पहुंची। छात्राओं की नाराजगी देख कुलपति प्रो. डीसी गुप्ता उनसे मिले। छात्राएं पीने के पानी की समस्या की शिकायत करने पहुंची थी। छात्राओं ने एक के बाद एक कई समस्याएं गिना डाली। उन्होंने कहा कि मेस में खाना घटिया मिलता है। हर कभी खाना कम भी पड़ जाता है और वो भी पसंद का नहीं मिलता। छात्राओं ने कहा कि मेस को-आॅपरेटिव पैटर्न पर चलता है, इसके बाद भी यहां हमारी बात नहीं सुनी जाती। मेस वर्कर अपनी मनमर्जी से काम करते रहते हैं। वे अपनी इच्छा से ही खाना बनाते हैं। कई बार आपत्ति दर्ज कराने पर भी सुधार नहीं हो रहा है। महीने में एक बार आने वाले फीस्ट-डे पर मिठाई भी सभी को नहीं मिलती। वहीं छात्राओं ने कहा कि हॉस्टल में पीने का पानी भी नहीं मिलना बंद हो गया है। आए दिन आरओ खराब हो जाता है। इसलिए इसकी व्यवस्था जल्द ही ठीक होनी चाहिए।

वार्डन हटाने की मांग

छात्राओं ने कुलपति के सामने हाॅस्टल की वार्डन डॉ. अनीता धुर्वे को हटाने की मांग भी सामने रखी है। इनका आरोप है कि वार्डन से शिकायत करने जाती हैं तो वे बद्तमीजी से बात करती हैं। उनसे किसी भी काम से भी मिलो तो वो सही से बात नहीं करती। कुलपति ने वार्डन काे बदलने का आश्वासन दिया है।

छात्राओं की समस्याएं दूर करने के लिए संबंधितों को निर्देश दे दिए हैं। मुख्य समस्या पानी की थी तो तत्काल पहुंचाया है एक्वागार्ड लगाने को कहा है। खाने की क्वालिटी की शिकायत भी है। जिसका हम परीक्षण कराएंगे। यहां मेस को-आॅपरेटिव है इसलिए किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले छात्राओं से ही चर्चा कर निर्णय लेंगे। मैं भी हॉस्टल का निरीक्षण करूंगा। प्रो.डीसी गुप्ता, कुलपति बीयू

सातवें वेतनमान के लिए एमएलबी के सामने जुटे प्रोफेसर्स

भोपाल| यूजीसी के सातवें वेतनमान की मांग को लेकर प्रोफेसर्स ने दूसरे दिन भी प्रदर्शन किया। मंगलवार को प्रोफेसर्स शासकीय एमएलबी कॉलेज के सामने जमा हुए थे। यहां करीब एक घंटे तक प्रोफेसर्स ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. कैलाश त्यागी का कहना है कि जब तक शासन प्रोफेसर्स को यूजीसी का सातवां वेतनमान दिए जाने की घोषणा नहीं कर देता तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उनका कहना है कि शासन के ही अन्य विभागों सहित दूसरे राज्यों में सातवां वेतनमान दे दिया गया है। लेकिन प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसर्स को अब तक नहीं दिया गया है।

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