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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- हर 6 घंटे में एक दुष्कर्म, मप्र में सबसे ज्यादा; रोके क्यों नहीं जा रहे?

3 वर्ष पहले
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देश में दुष्कर्म की घटनाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि साल में दुष्कर्म के 38,947 केस दर्ज होते हैं। यानी हर छह घंटे में एक दुष्कर्म। लेफ्ट, राइट और सेंटर हर जगह दुष्कर्म हो रहे हैं। मप्र में सबसे ज्यादा। देश में यह क्या हो रहा है? यह रोका क्यों नहीं जा रहा? बिहार के मुजफ्फरपुर के शेल्टर होम दुष्कर्म केस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की। कोर्ट ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में दुष्कर्म पीड़िता का फोटो किसी भी हालत में नहीं छापने का आदेश दिया है। पहचान छिपाकर या धुंधला करके भी फोटो नहीं छपेगा। नाबालिग पीड़िता के इंटरव्यू पर भी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य आयोग के सदस्य ही काउंसलर की मौजूदगी में बच्ची से बात कर सकेंगे। शेष | पेज 13 पर



कोर्ट ने केंद्र से यह बताने को कहा है कि शेल्टर होम्स में शोषण रोकने को क्या-क्या कदम उठाए हैं। एनजीओ पर सर्वे रिपोर्ट भी मांगी है। अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी।



मालीवाल काे फटकार, कहा- राजनीति न करें:

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने पक्षकार बनने की अपील की। कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीति कोर्ट से बाहर रखें। इस मामले में आप कौन हैं? एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि एक आरोपी की प|ी ने पीड़ित बच्चियों के फोटो फेसबुक पर डाल दी थी। कोर्ट ने उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।

जस्टिस मदन बी. लोकुर, दीपक गुप्ता और केएम जोसेफ की बेंच ने दोपहर बाद करीब सवा 12 बजे सुनवाई शुरू की। लंच ब्रेक से पहले और बाद में करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई। बिहार सरकार की ओर से एएसजी रंजीत सिंह ने पक्ष रखा।

अपर्णा भट्‌ट (एमिकस क्यूरी) : शेल्टर होम की एक बच्ची लापता है। 40-41 बच्चियां निकाली गईं।

रंजीत कुमार (बिहार सरकार) : 23 मई को रिपोर्ट मिली थी। सरकार ने 31 मई को कार्रवाई की। लड़कियां 29 मई को ही शिफ्ट की जा चुकी थीं।

जस्टिस एमबी लोकुर : लोगों के टैक्स से ऐसी संस्थाओं को फंड मिलता है। 3-4 साल बिना जांच एनजीओ को फंड दिया। ऐसे शेल्टर होम्स को सरकार फलने-फूलने क्यों देती है?

रंजीत : एनजीओ का सोशल ऑडिट कराते रहते हैं।

अपर्णा : अधिकारी सिर्फ फाइलें जांचते थे। किसी बच्ची से बात नहीं की। शेल्टर होम्स का सोशल ऑडिट स्वतंत्र एजेंसी से करवाना चाहिए।

जस्टिस लोकुर : शेल्टर होम्स की रोज मानिटरिंग होनी चाहिए। बिहार सरकार ने शेल्टर होम की विश्वसनीयता की जांच कब की थी? क्या लड़कियों की काउंसलिंग कराई?

अपर्णा : यह सिर्फ एक एनजीओ के शेल्टर होम में गड़बड़ का मामला नहीं है। सरकार के सर्वे में सरकारी फंड पर पनप रहे ऐसे 15 और एनजीओ का पता चला है।

जस्टिस लोकुर : यूपी के देवरिया में भी ऐसी घटना हुई है। दुष्कर्म की घटनाएं सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश में और दूसरे नंबर पर यूपी में होती हैं। बिहार में भी स्थिति खराब है। इन्हें रोका क्यों नहीं जा रहा?

रंजीत : राज्य सरकार एनजीओ पर की गई कार्रवाई पेश करेगी, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं करेंगे। अभी कुछ लोगों पर कार्रवाई बाकी है। एनजीओ का फंड रोक दिया है।

जस्टिस लोकुर : एनजीओ को केंद्र की एडवाइजरी फॉलो करने के लिए कैसे बाध्य करेंगे? क्या फंड रोकने से समस्या कम होगी? एनजीओ का ऑडिट कैग से होना चाहिए।



मप्र में बेटियां असुरक्षित?

एनजीओ का सोशल ऑडिट करवाते हैं : बिहार सरकार

2017 में 4543 और 2016 में 4789 केस दर्ज

अफसर फाइलें जांचते हैं, बच्चियों से नहीं मिलते : एमिकस क्यूरी

कलेक्टरों को निर्देश

मध्यप्रदेश के बालिका गृहों में हर माह बच्चों की मेडिकल जांच की जाएगी

पॉलिटिकल रिपोर्टर, भोपाल | मुजफ्फरपुर की घटना के बाद मप्र में महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी गाइडलाइन जारी कर दी है। सभी कलेक्टरों को जिम्मा सौंपा गया है कि वे बाल देख-रेख संस्थान, दत्तक ग्रहण एजेंसी, बालगृह, संप्रेक्षण गृह, खुला आश्रयगृह में रह रहे 18 वर्ष तक के बालक व बालिकाओं की सुरक्षा करें। किसी के साथ भी शोषण या लैंगिक घटना नहीं हो। खासतौर पर बालिका गृह के लिए विभाग के कमिश्नर डॉ. अशोक कुमार भार्गव ने कहा है कि माह में एक बार प्रत्येक बच्ची का स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा पूरा मेडिकल परीक्षण कराया जाए। यदि बालक गृह है तो भी यही प्रक्रिया अपनाई जाए। डॉक्टर हर सप्ताह भ्रमण भी करें। शेष | पेज 13 पर

(देवरिया सेक्स रैकेट : छुड़ाई गईं 24 लड़कियों में से 3 ने यौन शोषण के आरोप लगाए | पेज 16)







0000 अहम निर्देश

- पुलिस वेरीफिकेशन के बाद ही बालक व बालिका गृहों में काम करने वाले लोग रखे जाएं।

- मनोचिकित्सक और परामर्शदाता के माध्यम से हर बच्चे से बात की जाए।

- बालिका गृहों में महिला कर्मचारी तैनात होने चाहिए।

- यदि किसी अधिकारी द्वारा लड़कों या लड़कियों से संस्था के कर्मचारियों की अनुपस्थिति अलग से बात की जाती है तो उसकी सूचना दी जाए।

- लिंग, धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव-धर्मांतरण जैसी घटनाएं न होने दें।

- सीसीटीवी कैमरे लगाकर प्रतिदिन रिकॉर्डिंग की जाए।

- बालिका गृह में बिना सक्षम व्यक्ति की मंजूरी के प्रवेश प्रतिबंधित हो। बाहरी व्यक्ति का प्रवेश भी रोका जाए।

- हर संस्था में शिकायत पेटी लगाई जाए। उसे अधिकृत व्यक्ति ही खोले।

- दस वर्ष से अधिक बच्चे हैं तो लड़के और लड़कियों को अलग रखा जाए।

पीएचक्यू की रिपोर्ट

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