देश के प्रख्यात भू वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया की शनिवार को हरदा रोड पर सड़क हादसे में मौत हो गई। भोपाल में शाहपुरा इलाके के सहयोग विहार निवासी डॉ. सोनकिया अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा से लौट रहे थे। होशंगाबाद टोल नाके के पास टायर फटने से अनियंत्रित हुए ट्राले ने डॉ. सोनकिया की कार को टक्कर मारी। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
डॉ. सोनकिया अपने पुस्तैनी घर को रिकंस्ट्रक्शन करा रहे थे। इसी सिलसिले में इन दिनों उनका बार-बार गांव आना-जाना हो रहा था। उनके छोटे बेटे विवेक ने बताया कि वे इस हफ्ते में तीसरी बार गांव गए थे। दोपहर करीब 11 बजे गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने घर बनाने वाले कांट्रेक्टर, लेबर और बिल्डिंग मटेरियल सप्लाई करने वालों को बयाना दिया था। जल्दी ही मकान का काम शुरू होना था। घर पुराने पैटर्न पर ही रीकंस्ट्रक्शन होना था। वे दोपहर करीब 1.30 बजे गांव से भोपाल के लिए निकले थे, तभी हादसा हो गया। विवेक सोलर एनर्जी का व्यवसाय करते हैं, जबकि डॉ. सोनकिया के बड़े बेटे सिद्धार्थ मुंबई ओएनजीसी में पदस्थ हैं। उनकी बेटी श्वेता भी मुंबई में ही रहती हैं। रविवार सुबह करीब 10 बजे डॉ. सोनकिया का अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में ही रहने वाले उनके भतीजे विनायक ने बताया कि दोपहर करीब ढाई बजे भोपाल से ताई जी का फोन आया और उन्होंने ताऊ जी का एक्सीडेंट होने की बात कही। किसी ने घटना स्थल से ताई जी को एक्सीडेंट की सूचना दी थी। विनायक मौके पर पहुंचे तब तक उनकी माैत हो चुकी थी।
5 लाख साल पुराना मानव कपाल खोजा
भू वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया ने नर्मदा नदी के तट पर बसे ग्राम हथनौरा में 5 दिसंबर 1982 में मानव जीवाश्म की खोज की थी। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने पांच लाख साल पुराने मानव के कपाल अवशेष खोजे थे। इस प्राचीन मानव को वैज्ञानिकों द्वारा नर्मदा मानव का नाम दिया गया। इस कंकाल का आकलन ईएसआर (इलेक्ट्रॉन स्पीन रेजोलेंस) डेटिंग पद्धति से किया था। इससे यह साबित किया गया कि मानव के विकास की कहानी भारत में शुरू होती है। तब डॉ. अरुण सोनकिया ने बताया था की इससे पूर्व आदि मानव की उत्पत्ति की जानकारी पूर्वी अफ्रीका के तंजानिया अंतर्गत ओल्डवाईगॉज नामक स्थान से मिलती रही है। नर्मदा मानव की 5 लाख साल पुरानी खोपड़ी आज भी मानव विज्ञान संग्रहालय नागपुर में देखी जा सकती है। इसे धरोहर स्वरूप रख गया है। हथनोरा के सामने के ग्राम धांसी और सूरजकुंड में नर्मदा के उत्तरी तट पर प्राचीनतम विलुप्त हाथी (स्टेगोडॉन) के दोनों दांत तथा ऊपरी जबड़े का जीवाश्म भी उन्होंने खोजा था।