भोपाल| हाईकोर्ट के निर्देश के बाद चूनाभट्टी पुलिस ने भोज मुक्त विश्वविद्यालय से निलंबित चल रहे प्रोफेसर डॉ. प्रवीण जैन के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एफआईआर दर्ज कराने से पहले पुलिस को 1600 से अधिक पेज का कच्चा-चिट्ठा सौंपा था। इसमें विभिन्न कोर्स से जुड़े टेबुलेशन रजिस्टर की ऐसी फोटो कॉपी भी शामिल है जिसमें डॉ. जैन द्वारा फेल छात्रों को पास कर दिया गया है। इसमें छात्रों को पास करने के लिए कम नंबर को गोल घेरे में करके नंबर बढ़ाए गए थे। डॉ. जैन काे लेकर लंबे समय से विवादित स्थिति बनी हुई है। पहले राजभवन भी इस मामले में विवि प्रशासन को कार्रवाई करने के निर्देश को दे चुका है। अब इस मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने से पुलिस की जांच में परीक्षा व स्थापना शाखा से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
डॉ. जैन पर कर्मचारियों की नियुक्ति व रोस्टर में गड़बड़ी करने सहित एक दर्जन आरोप हैं। पुलिस द्वारा इन आरोपों की नए सिरे से जांच की जाएगी। इस पूरे मामले में डॉ. जैन की मुसीबत बढ़ती नजर जा रही है। उधर, पुलिस के साथ ईओडब्ल्यू भी जांच शुरू कर सकती है। इस मामले में ईओडब्ल्यू द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी होने की बात सामने आयी है।
टेबुलेशन रजिस्टर में अकेले जैन के हस्ताक्षर...
डॉ. जैन द्वारा विद्यार्थियों के रिजल्ट से संबंधित टेबुलेशन रजिस्टर को मनमाने तरीके से संशोधित किया गया तथा वर्ष 2013 के परीक्षार्थियों के पुनर्मूल्यांकन कार्य में परीक्षकों द्वारा दिए गए अंकों में काटछांट, परिवर्तन, वृद्धि करके संबंधित छात्रों को अनुचित लाभ पहुंचा गया। टेबुलेशन रजिस्टर में डॉ. जैन ने स्वयं अकेले के हस्ताक्षर कर दिए गए थे। जबकि नियमानुसार टेबुलेशन रजिस्टर में सुधार रजिस्ट्रार एवं कुलपति के नोटशीट के आधार पर किया जा सकता है।
34 लाख का नियम विरुद्ध भुगतान --
ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच के अनुसार डॉ. जैन ने प्रवेश एवं मूल्यांकन के निदेशक रहते हुए 2001-04 के बीच विवि की ट्रेजरी से 34,41,822 का नियम विरुद्ध तरीके से नगद भुगतान मुद्रक लक्ष्मीकांत गुप्ता को किया गया। विवि की वित्तीय व्यवस्था के मुताबिक 30 हजार रुपए से अधिक राशि के कार्य के लिए खुली निविदा बुलाई जाती है। लेकिन जैन द्वारा ऐसा नहीं कर तीन फर्मों के कोटेशन बुलाकर प्रश्नपत्र छपाई का कार्य मुद्रक लक्ष्मीकांत को दिया गया था।
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प्रबंधन बोर्ड के निर्देशन में कुलपति विवि का संचालन करते हैं। विवि प्रशासन के अनुमोदन के बिना कोई भी कार्रवाई संभव नहीं होती। किसी भी कार्य में व्यक्ति विशेष के विरुद्ध शिकायत कर एफआईआर कराना दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है। जोकि जांच में स्पष्ट हो जाएगी। विवि स्तर पर अभी तक कोई भी पक्ष नहीं सुना गया है।
प्रो. प्रवीण जैन, पूर्व डायरेक्टर (निलंबित)