मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में सत्र 2017-18 में एनआरआई कोटे के तहत एमबीबीएस एवं बीडीएस सीटों पर एडमिशन पाने वाले उन 107 छात्रों का मामला एडमिशन एण्ड फी रेग्यूलेटरी कमेटी (एएफआरसी) को सौंप दिया है जिनके एडमिशन डीएमई ने निरस्त कर दिए थे। जस्टिस आरएस झा एवं जस्टिस राजीव दुबे की खंडपीठ ने एएफआरसी को निर्देश दिए कि वह सभी छात्रों की जांच कर यह तय करे कि नियमों के तहत उनका एडमिशन सही है या नहीं। हाईकोर्ट ने एएफआरसी द्वारा अंतिम निर्णय लिए जाने तक एडमिशन निरस्त किए जाने के आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने सभी 107 छात्रों को 31 मई को एएफआरसी के समक्ष हाजिर होने के निर्देश दिए हैं।
2017 में प्रवेश को लेकर एक जनहित याचिका लगी थी। जिसमें एनआरआई कोटे की सीटों पर नियमविरुद्ध एडिमशन देने के आरोप लगाए थे। इसके बाद हुई जांच में 107 छात्रों के एडमिशन निरस्त किए गए थे। डीएमई के इस फैसले को चुनौती देते हुए 107 एनआरआई छात्रों की ओर से करीब 50 याचिकाएं दाखिल की गईं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे और सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने गलत प्रक्रिया अपनाकर और प्रभावित छात्रों का पक्ष सुने बिना एडमिशन निरस्त किए हैं।
ये है सुको गाइडलाइन -सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने यह अभिनिर्धारित किया है कि निजी मेडिकल कॉलेज के सभी अनिवासी भारतीयों के प्रवेश को सीधे अमान्य नहीं किया जा सकता। जिन छात्रों के माता-पिता या सगे अभिभावक एनआरआई हैं, उनको इसका लाभ मिलना आवश्यक है।
हाईकोर्ट ने कहा एएफआरसी प्रत्येक छात्र की जांच कर तय करे कि उसका एडमिशन सही है या नहीं
कहां कितने एडमिशन निरस्त
अमलतास, देवास 20
इंडेक्स, इंदौर 19
अरविंदो, इंदौर 13
आरडी गार्डी, उज्जैन 13
एलएन मेडिकल कॉलेज, भोपाल 15
पीपुल्स, भोपाल 6
चिरायु, भोपाल 21
सभी पक्ष सुनकर जांच करे एएफआरसी
सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने एएफआरसी को निर्देश दिए कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पीए ईनामदार प्रकरण में निर्धारित मापदंडों के अनुसार सभी 107 छात्रों के दस्तावेजों और अभिलेखों की जांच कर यह निर्धारित करें कि वह एनआरआई कोटे के तहत एडमिशन पाने की अहर्ता रखता है या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि चूंकि यह मामला पहले से ही अदालत में है, इसलिए अब किसी भी छात्र को अलग से नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है।