पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • विधानसभा चुनाव से पहले नरोत्तम को बड़ी राहत दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा पेड न्यूज के सबूत नहीं

विधानसभा चुनाव से पहले नरोत्तम को बड़ी राहत दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- पेड न्यूज के सबूत नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
2013 में कारण बताओ नोटिस। अगस्त 2017 में चुनाव अयोग्य घोषित।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले पर स्टे दिया, मामला दिल्ली हाईकोर्ट भेजा।

10 अक्टूबर 2017 को हाईकोर्ट में ऑर्डर रिजर्व, फैसला सात माह बाद।

भास्कर न्यूज . नई दिल्ली/ भोपाल | दिल्ली हाईकोर्ट ने पेड न्यू मामले में जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा को विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी राहत दे दी है। जस्टिस एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस सुनील गौड़ की बेंच ने बुधवार को चुनाव आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मिश्रा को 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज मामले में दोषी पाए जाने पर विधानसभा की सदस्यता और तीन साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कोर्ट ने सिंगल बेंच के 14 जुलाई 2017 के उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा गया था। बेंच ने अपने आदेश में कहा कि उन्हें सुनवाई के दौरान इस बारे में पर्याप्त सबूत नहीं मिले कि 2008 के मप्र विधानसभा चुनावों के दौरान समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें पेड न्यूज थीं। शेष | पेज 15 पर

10 अक्टूबर 2017 को कोर्ट ने मामले में ऑर्डर रिजर्व किया था। 7 माह बाद कोर्ट ने अपना यह निर्णय दिया है।





याचिकाकर्ता के वकील की दलीलें

शिकायतकर्ता के वकील आल इंडिया कांग्रेस लीगल सेल के अध्यक्ष विवेक तन्खा ने अपनी दलीलों में यह कहा था कि यह देश का सबसे बड़ा पेड न्यूज का मामला है। जांच कमेटी ने मिश्रा के समर्थन में प्रकाशित 48 आर्टिकल में से 42 पेड न्यूज पाए थे। उन्होंने दलील दी थी कि न्यूज प्रकाशित होने का समय, उनकी भाषा, तारीख, हेडलाइन सब यह साबित करती हैं कि प्रकाशित न्यूज पेड न्यूज थीं। पेड न्यूज के बारे में जांच कर रही समिति ने मंत्री को जांच रिपोर्ट समेत कारण बताओ नोटिस भेजा, लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया। जिन दो पत्रकारों ने मंत्री के हक में बयान दिए वह उनके दोस्त थे। वह समाचार प्रशासन द्वारा उनका पक्ष रखने के लिए अधिकृत नहीं थे पूछने पर खुद उन्होंने यह बात कबूली है। उन्होंने कहा था कि यह चुनाव आयोग का काम है कि वह प्रत्याशियों के चुनाव खर्च पर नजर रखें। चुनाव खर्च तय नियम से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

मंत्री के वकील की दलीलें

मंत्री के वरिष्ठ वकील सुंदरम, वंशजा शुक्ला और भारत सिंह ने कोर्ट में कहा था कि समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें पेड न्यूज नहीं थी। समाचार पत्रों ने खुद यह मानते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी मर्जी से यह खबरें प्रकाशित की। ऐसे में उनके खिलाफ मामला नहीं बनता है। वकील ने तर्क रखा कि इस मामले में 2013 में पहली बार उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। जिसके 4 साल बाद चुनाव आयोग ने 26 अगस्त 2017 को उनके खिलाफ कार्रवाई की। यह कार्रवाई देरी से की गई। उनका आरोप था कि इस मामले में शिकायतकर्ता को लाभ दिया गया है। चुनाव आयोग ने अपने आप ही मान लिया कि यह पेड न्यूज है। पहले शिकायतकर्ता को यह साबित करना होगा कि समाचार पत्रों में पेड़ न्यूज प्रकाशित हुई थी। पेड न्यूज वो होता है जिसके लिए पैसे दिए गए। पैसे कोई भी दे सकता है चाहे राजनीतिक दल हो या फिर उम्मीदवार का समर्थक।



यह है पूरा मामला

हाईकोर्ट से पूर्व नरोत्तम मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग के फैसले पर रोक लगा दी थी। आयोग ने नरोत्तम मिश्रा को 2008 के विधानसभा चुनाव में पेड न्यूज के मामले में अयोग्य घोषित किया था। इस वजह से नरोत्तम राष्ट्रपति चुनाव में वोट भी नहीं डाल पाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले पर रोक लगाने के साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट को मामले की जल्द सुनवाई के निर्देश दिए थे। पहले सिंगल बेंच ने आयोग के आदेश को बरकरार रखा। इस निर्देश को डबल बेंच में चैलेंज किया गया था।

याचिकाकर्ता बोले राजेंद्र भारती बोले -

माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत 8 महीने बाद फैसला आना अन्याय की श्रेणी के अंतर्गत पहले से ही था। भ्रष्ट मंत्री को कोर्ट द्वारा संरक्षण दिए जाने से न केवल चुनाव आयोग के अस्तित्व को चुनौती दी गई बल्कि कानून से जनता का विश्वास ही खत्म हो जाएगा। हाईकोर्ट के डबल बैंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के मामले में पार्टी तय करेगी।

खबरें और भी हैं...