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डाॅक्टर की कमी या अस्पताल बंद करने की साजिश?

3 वर्ष पहले
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भूली में बीसीसीएल के क्षेत्रीय अस्पताल में प्रबंधन की उपेक्षा के कारण पहले से ही कई सुविधाएं बंद थी, डाॅक्टर की कमी के कारण कई शिफ्ट सिर्फ नर्सों और कंपाउंडरों के हवाले रहता था। उस पर नर्सों के सामूहिक तबादले के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पिछले कई वर्षों से डाॅक्टरों की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल में डाॅक्टर के पदस्थापना करने के बजाय वहां पदस्थापित 5 नर्सों का सामूहिक तबादला कर दिया गया। 5 नर्सों में 3 नर्सों को सेंट्रल हॉस्पिटल धनबाद तथा 2 नर्सों को क्षेत्रीय चिकित्सालय मुनीडीह भेजा गया है। पूर्व में यहां हरेक विभाग के लिए अलग-अलग विशेषज्ञ डाॅक्टर थे। धीरे-धीरे तबादले के बाद डाॅक्टरों की संख्या घटती गई। यहां से अधिकांश डाॅक्टरों का तबादला कर आपरेशन थियेटर, इंडोस्कोपी, इसीजी समेत मरीजों को मिलने वाली अधिकांश सुविधाएं बंद कर दी गई और 50 बेड वाला अस्पताल अब 30 बेड का हो गया है और 20 डाॅक्टरों में महज 4 डाॅक्टर रह गए हैं। अब यह अस्पताल सिर्फ रेफरल अस्पताल बन कर रह गया है। पिछले कई वर्षों से इस अस्पताल में इलाज के नाम पर मरीजों को प्राथमिक उपचार कर उन्हें अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है। करोड़ों का उपकरण और भवन आज जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। बीसीसीएल के कर्मियों के साथ भूली की करीब एक लाख की आबादी इस बुलंद इमारत वाले अस्पताल के रहते हुए भी विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी के कारण चिकित्सीय सेवाओं के लिए परेशान है।

डाॅक्टर की कमी के कारण खाली पड़ा अस्पताल का बेड और क्षेत्रीय अस्पताल भूली का विशाल भवन।

अगर डाॅक्टर नहीं मिला तो डिस्पेंसरी बन कर रह जाएगा भूली का क्षेत्रीय अस्पताल

कई बार लिखित रूप से डॉक्टरों की मांग की

इस अस्पताल में ही नहीं बीसीसीएल के सभी अस्पतालों में डाॅक्टर की कमी है। हमने कई बार लिखित रूप से डाॅक्टरों की मांग भी की है लेकिन हमलोगों को बोला जाता है कि इतना ही डाॅक्टर है आपको इसी में चलाना है तो हम क्या कर सकते हैं। 2 डाॅक्टर भी और मिल जाता तो मरीजों को काफी सुविधा होती। अगर डाॅक्टर नहीं मिला तो आने वाले दिनों में और भी स्थिति खराब हो जाएगी क्योंकि, कुछ महीनों मे 2 डाॅक्टर रिटायर्ड हो रहे हैं, उसके बाद तो मात्र 2 डाॅक्टर ही इस अस्पताल में रह जाएंगे।\\\'\\\' -डाॅ रेणुका शर्मा, सीएमओ क्षेत्रीय चिकित्सालय, भूली

रात में नहीं रहता है कोई डाॅक्टर

डाॅक्टरों की कमी के कारण पिछले कई महीनों से रात्रि पाली में एक भी डाॅक्टर नहीं रहते हैं। हालांकि अस्पताल में लगे डाॅक्टरों के ड्यूटी चार्ट में रात पाली में भी डाॅक्टर की सूची बनाई जाती है। अस्पताल के सीएमओ डाॅ रेणुका शर्मा का कहना है कि डाॅक्टर की कमी के कारण रात पाली में आॅन काॅल डाॅक्टर उपलब्ध रहते हैं, लेकिन ऐसा होता नहीं है। मरीज के आने के बाद जब अस्पताल कर्मी डाॅक्टर को काॅल करते हैं तो न कोई सकारात्मक जवाब मिलता है और न ही कोई डाॅक्टर अस्पताल आते हैं। डाॅक्टर के नहीं मिलने से अस्पताल कर्मियों को ही मरीज के परिजनों का कोपभाजन बनना पड़ता है। मरीज के परिजनों को सारा गुस्सा अस्पताल कर्मियों पर ही फूट पड़ता है।

वर्षों से बंद है प्रसूति गृह : विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं होने की वजह से अस्पताल का प्रसुति गृह पिछले कई वर्षों से बंद है। भूली एवं आसपास के हजारों की आबादी अब इस सुविधा के लिए पूरी तरह निजी क्लीनिकों पर आश्रित है, अब इस अस्पताल में प्रसूतियों के लिए कोई भी विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं है। जब इस अस्पताल में प्रसुति विभाग के विशेषज्ञ डाॅक्टर थे तो प्रसुति विभाग हमेशा मरीजों से भरा रहता था।

एक भी विशेषज्ञ डाॅक्टर नहीं : अस्पताल अब पूरी तरह सामान्य डाॅक्टरो के हवाले कर दिया गया है। उसमें भी डाॅक्टरों की संख्या काफी कम है, जबकि पूर्व में यहां हरेक विभाग के लिए विशेषज्ञ डाॅक्टर हर वक्त मौजूद रहते थे। विशेषज्ञ डॉक्टर के नहीं रहने से अस्पताल में आने वाली मरीजों की संख्या दिन पर दिन घटती जा रही है। पहले जब सभी विभाग के विशेषज्ञ डाॅक्टर थे तब प्रतिदिन मरीजों की संख्या 250 थी, अब वह संख्या घटकर मात्र 70 पर आ गई है।

भूली अस्पताल के स्वर्णिम अतीत से बदहाली का सफर

भूली स्थित इस अस्पताल का निर्माण भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा सन 1950 में किया गया था। उस समय एक साथ ही धनबाद (जगजीवन नगर) का टीबी अस्पताल, कल्ला अस्पताल आसनसोल और भूली अस्पताल का निर्माण तत्कालीन भारत के प्रथम श्रममंत्री बाबू जगजीवन राम के द्वारा कराया गया था। उस समय श्रमिकों (संगठित और असंगठित) को स्वास्थ्य सेवा के लिए इन अस्पतालों का निर्माण हुआ था। जगजीवन नगर का टीबी अस्पताल आज धनबाद का केंद्रीय चिकित्सालय है। भूली अस्पताल में निर्माण काल से ही 50 बेड की सुविधा उपलब्ध थी। बीसीसीएल द्वारा अधिग्रहण से पूर्व तक इस अस्पताल में सभी प्रकार के श्रमिकों सहित आसपास के लाखों ग्रामीणों को यहां निशुल्क चिकित्सा एवं दवा मिलती थी। वर्ष 1986 में कोयला खान श्रमिक कल्याण संस्था (सीएमएलडब्लूओ) का बीसीसीएल में विलय के बाद भूली अस्पताल का स्वर्णिम काल का क्षय होना प्रारंभ हो गया। पहले तो बीसीसीएल ने इस अस्पताल का नाम क्षेत्रिय अस्पताल रखा और उसके बाद गैर बीसीसीएल कर्मियों का इलाज करना बंद कर दिया। बाद में काफी हो हंगामा के पश्चात ग्रामीणों और गैर बीसीसीएल कर्मियों का भी इलाज होने लगा। केंद्रीय अस्पताल में मरीजों की बड़ी संख्या को देखकर तत्कालीन बीसीसीएल प्रबंधन ने भूली अस्पताल को विकसित करने की योजना बनाई और एम्स के विशेषज्ञ डाक्टरों के निर्देशन में करोड़ों की लागत से पुराने अस्पताल परिसर में नया व विशाल भवन बनाया गया तथा लगभग 20 डाॅक्टरों की तैनाती की गई। धीरे-धीरे अस्पताल का पतन शुरू होने लगा।

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