वाटर लेबल सौ फीट नीचे, बढ़ रहा जल संकट
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। पीने और निस्तारी के लिए लोगों के भटकना पड़ रहा है। लगातार जलस्तर नीचे चले जाने से बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद हो रहे हैं।
ट्यूबवेल का वाटर लेबल सौ फीट से नीचे चला गया है। कुंआ, तालाब सूखने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या आ रही है। इसके बाद भी अधिकारी इससेके निराकरण का प्रयास नीं कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में तालाब पूरी तरह से सूख गया है। इसके कारण आम लोग व जानवरों के लिए समस्या है। परेशान लोग दूर दराज से पीने एवं घरेलू उपयोग के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे है। अधिकांश गांव के ग्रामीणों ने बताया गांव में हैंडपंप बंद होते जा रहे हैं जिससे पीने का पानी की समस्या हो रही है। वहीं शासन की जल आवर्धन योजना के तहत गांवों में पाइप लाइन के माध्यम से पानी पहुंचा था जो बंद पड़ा है। तालाबों के पास गांव गंगा योजना के तहत बोर खनन कराए गए थे, बोर भी बंद पड़े हैं। बता दें कि ग्रामीण क्षेत्र में अप्रैल से ही तलाब सूखने से गंभीर है। मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि व जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके कारण सारंगपुर, सिंगारपुर, केशलीकला पंडोतरा, दुल्लापुर, भूमियापारा, गोरखपुर, सेतगंगा, माराडबरी, मुढ़िया, खुर्सी, कोदवाबानी, निपनिया, धरमपुरा, जोगीपुर, गुना, सिंगबांधा, बामपारा, करूपान, रामाकापा, पौनी, डोडा, टेमरी, तालम, नागोपहरी, किंगरियापारा, नकटापारा, टेंढहाधौंरा, पलानसरी, बिरगहनी, लालपुर, कोलिहा, भीमपुरी,ं चिरौंजपुर, जल्ली ,उसलापुर, चुचरूंगपुर, मानपुर, कंचनपुर, नेवासपुर, जेठूकापा, सुरदा, देवगांव, संगवा, देवरी, उमरिया, जकोर, कंतेली, हरदीडीह महादेवगढ़, बोधापारा सहित तलाब सूख चूके हैं और ग्राीमण पानी के लिए परेशान हो रहे हैं। खराब हैंडपंप सुधरवाने को लेकर विभाग के पीएचई के एसडीओ से संपर्क कर स्थिति जानने की कोशिश की गई परंतु उनसे संपर्क नहीं हो सका। इसके चलते हाल फिलहाल लोगों को पानी की समस्या का निराकरण होता नहीं दिख रहा।
हैंडपंपों से पानी निकलना हो रहा बंद, कंुआ और तालाब भी सूख रहे
2012 में जलआवर्धन योजना की शुरुआत हुई थी
बता दें कि अविरल विकास यात्रा 2008 में क्षेत्र के लगभग दस से 12 गांवों में जलआवर्धन योजना की शुरुआत की गई थी, जो शुरू से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। ग्राम नेवासपुर में जल आवर्धन योजना 2009 में बोर खनन व पाइप लाइन विस्तार किया गया था, जिसकी लागत 95 लाख से निर्माण कार्य कराया गया जो कुछ ही माह में बंद हो गई है। इसके कारण ग्रामीणों को दो किलो मीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है वे सुबह शाम साइकिल में डिब्बे से पानी ला रहे हैं।