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प्राइवेट ट्यूबवैलाें को 400 से 600 रुपए देकर लेना पड़ रहा है पीने के लिए पानी

3 वर्ष पहले
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उपखण्ड के गांव रणधीरगढ़ में सरकार द्वारा पेयजल व्यवस्था के लिए पेयजल टंकी, ट्यूबवैल तो लगा दिए गए लेकिन ग्रामीणों को घरों तक पेयजल की सप्लाई के लिए पाइप लाइनें नहीं बिछाई गई हैं जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए पानी की टंकियों और ट्यूबवैलों तक दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा निजी ट्यूबवैल मालिकों को 400 से 600 रुपए प्रतिमाह देकर पानी के लिए पाइपों का जाल छतों एवं काॅलोनी की गलियों में होकर डाल रखा है जिससे घरों तक पानी पहुंचता है।

रणधीरगढ़ की कुछ काॅलोनियां ऐसी हैं जहां हर 5वें घर की छत पर विद्युत तारों की तरह पानी के पाइप लाइनों का जाल बिछा हुआ है। जहां से वाहनों को निकलने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल के लिए बनी टंकी काफी दूरी पर होने के कारण पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। क्षेत्र में गर्मी लगातार बढ़ने के कारण पानी की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। लेकिन गांव में बनी पानी की टंकी दूर होने के कारण ज्यादा पानी नहीं ला पाते हैं। जिस कारण गांव में लगे निजी ट्यूबवैलों को 400 से 600 रुपए प्रतिमाह देकर पानी की व्यवस्था की जाती है। बार-बार उच्च अधिकारियों को गांव में पेयजल लाइन बिछाने की मांग की जा रही है जिससे पेयजल के लिए हो रही परेशानियों से निजात मिल सके।

भुसावर। रणधीरगढ़ में छतों पर बिछा पेयजल पाइप लाईनों का जाल।

बिजली नहीं हो रणधीरगढ़ में निजी ट्यूबवैल वाले भी पीने का पानी नहीं देते हैं

पेयजल के लिए लाइन नहीं बिछी तो ज्यादातर ग्रामीण ऐसे लोगों पर निर्भर हो गए हैं जो कि सैकड़ों रुपए लेकर पानी उपलब्ध कराते हैं। जब लोगों को घरों में ही पानी उपलब्ध होने लगा तो दूसरों कामों के लिए भी इसी पानी का उपयोग करने लगे हैं। इन पाइन लाइन से पानी ऐसे ही आता है जैसे कि शहर में जलदाय विभाग की ओर से आपूर्ति की जाती है। बिजली नहीं तो पानी भी नहीं। ऐसे में ग्रामीणों को दूसरी जगह से पेयजल का जुगाड़ करना पड़ता है। गांव के सुक्खा भाई ने बताया कि सैकड़ों बार सरकार से अर्जी लगाई है पर हमारी तो कोई सुनवाई ही नहीं करता है।

जलदाय विभाग गांव के लिए नहीं बिछा रहा लाइन

वीं ऐसा भी नहीं है कि क्षेत्र में सरकार की ओर से कोई पानी की व्यवस्था नहीं की गई है। क्षेत्र में गांव से करीब एक किलोमीटर दूर एक पानी की टंकी बनी हुई है। विभाग यहां से पानी की लाइन नहीं बिछा रहा है। इसके लिए गांव के गरीब और अमीर सभी ने मिलकर कलेक्टर से लेकर जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों के साथ ही मंत्री और सीएम हाउस तक गुहार लगा चुके हैं पर प्रशासन की ओर से सख्ती नहीं दिखाने के कारण विभाग के अधिकारी भी पूरे मामले से पल्ला झाड़ लेते हैं। जानकर भी पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं।

भुसावर. टंकी से पानी लाती बालिकाएं।

30 रुपए रोज पानी के लिए देना गरीबों के लिए भारी

गांव में सबसे अधिक परेशानी उन लोगों के लिए है जो कि रोज दिहाड़ी कर खाने की जुगाड़ करते हैं। ऐसे लोगों को रोज पेयजल के लिए 30 रुपए देना भारी पड़ रहा है। इधर, क्षेत्र के लोगों ने बताया कि मामले को लेकर कई बार स्थानीय विधायक से मिल चुके हैं पर उनकी कोई सुनवाई ही नहीं हो रही है। इस कारण अब काई जनप्रतिनिधि पर उनको भरोसा नहीं रहा है।

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