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चांद दिखा तो रोजे कल से, तरावीह की नमाज आज

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | खटवाड़ा/बीगोद

इबादत का महीना रमजान चांद दिखने पर 17 मई से शुरू होगा। तेज गर्मी और दिन बड़े होने के चलते रमजान में अकीदतमंदों को सब्र का इम्तिहान देना पड़ेगा। रमजान करीब होने से तैयारियां शुरू हो गई हैं। समाज के लोग खेती-बाड़ी व अन्य घरेलू जरूरी काम पूरे करने की जल्दी में हैं ताकि रोजे के दिनों में भागदौड़ नहीं करनी पड़े और इबादत में ज्यादा वक्त दे सके। मस्जिदों की सफाई व गर्मी को देखते हुए पंखे, कूलर लगाए जा रहे हैं।

गर्मियों में दिन बड़े होते हैं। ऐसे में रोजे का समय भी इस दौरान सबसे अधिक रहता है। इस साल रमजान माह का सबसे अधिक समय का रोजा 15 घंटे 20 मिनट तक का होगा। अलग-अलग जगहों के हिसाब से समय में कुछ बदलाव हो सकता है। 16 मई की शाम को चांद नजर आने के साथ ही तरावीह की नमाज शुरू हो जाएगी। रात को सहरी कर रोजा रखेंगे। वहीं 17 मई को पहला रोजा किया जाएगा।

गुनाहों से बचाता है रोजा ...

मरकज़ मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल वहाब ने बताया कि रमजान हमें गुनाहों से बचने और भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है। रोजे सभी मर्द और औरतों पर फर्ज हैं। रोजे के मायने केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं है। बल्कि खुद को हर उस बात से रोकना है, जिससे किसी को तकलीफ पहुंचे। किसी की बुराई या ऐसी बात न बोलें जो किसी को बुरी लगे। ऐसे काम न करें जो किसी को तकलीफ पहुंचाए। उन जगहों पर न जाएं जहां गुनाह हो रहे हैं।

बच्चों को दूर रखने की नसीहत ... इस बार गर्मी अधिक होने से उलेमा ने छोटे बच्चों को रोजे से दूर रखने की नसीहत दी है। कई लोग पांच-सात साल के बच्चों को भी रोजा रखवा देते हैं। बच्चों पर रोजे फर्ज नहीं हैं। वहीं डॉ. रजनीश गौतम ने कहा कि रोजेदार धूप में निकलें। चक्कर आने या बेहोश होने की समस्या आ सकती है। रोजा खोलते समय तेल की चीजों व ठंडे पेय पदार्थ का प्रयोग नहीं करें। फल व जूस का सेवन करें। दही व छाछ का प्रयोग करते हुए हल्का भोजन करें।

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