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इस्सयोग जीवन को शांतिमय व आनंदमय बनाने का सरल मार्ग

3 वर्ष पहले
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दानापुर । परमात्मा प्रत्येक मानव के भीतर अपनी संपूर्ण दिव्यता के साथ प्रतिष्ठित रहते हैं। मनुष्य की अपनी ही लौकिक दुर्बलताएं, उसका स्वार्थ और कुत्सित कामनाएं उसे उसके स्वयं के भीतर स्थित परमात्मा से जीवन पर्यन्त दूर रखती है। इस्सयोग की सूक्ष्म और सहज साधना.पद्धति अपना कर मनुष्य अपने और अपने परमात्मा के बीच के इस दीवार को हटा अपने ब्रह्म.स्वरूप को पा सकता है। गोला रोड स्थित अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज के एमएसएमबी उत्सव भवन में शनिवार को आयोजित शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रम में सदगुरुमाता मां विजया जी ने यह बातें कहीं । मौके पर संस्था के संयुक्त सचिव सरोज गुटगुटिया, उमेश कुमार, संगीता झा, डा अनिल सुलभ, प्रकाश सिंह, अनंत कुमार साहू, शिवम झा, डा जेठानंद सोलंकी, किरण झा, ममता जमुआर समेत बड़ी संख्या में संस्था के अधिकारी, स्वयंसेवक तथा साधकगण उपस्थित थे।

श्रीराम ईश्वर के साथ ही पूर्ण मानव भी हैं
बिहटा। हनुमत प्राण प्रतिष्ठात्मक महायज्ञ सह राम कथा में हयग्रीवचार्य ने कहा भवसागर पार करने का सबसे उत्तम सेतु है राम का नाम। राम नर हैं या नारायण इसकी व्याख्या करते हुए सेवा कुंज काशी धाम के संत ने बताए कि श्री राम पूर्णत ईश्वर के साथ ही पूर्ण मानव भी है। गोखुलपुर कोरहर में चल रहे यज्ञ में स्वामी हयग्रीवाचार्य जी महाराज ने ये बातें कहीं। मंडप में आचार्य मनु पाठक, रघुपति पांडेय, आशुतोष पाठक, राधेश्याम पाठक, कृष्ण मुरारी पांडेय, शिवनंदन गिरी, अजय बाबा पूजा-पाठ करवाए।

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