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कड़ी धूप, उड़ती धूल, इरादे बुलंद

3 वर्ष पहले
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एक बजे की तीखी धूप थी। धूल भी उड़ रही थी। मगर सिर पर गमछा और तौलिया रख कर चिलचिलाती धूप में भी लोग बैठे थे। धर्म को बचाने की बात हो रही थी। वक्ताओं की बात को लोग गंभीरता से सुन रहे हैं। वक्ताओं की बात को खूब सराहा गया। खूब तालियां भी बजी।

कतारबद्ध होकर आगे बढ़ रहे थे

जितनी भीड़ थी, उतना ही अनुशासन भी था। मंच से पुलिस प्रशासन को सहयोग करने की अपील होती रही। लोग वाहनों के ऊपर भी बैठे दिखे। महिलाओं को बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गई थी। प्रशासन के निर्देश पर पंक्तिबद्ध होकर मैदान के अंदर लोग जा रहे थे।

सत्तू-शरबत से दिखाई मौजूदगी

भाजपा छोड़ सभी राजनीतिक दलों ने सम्मेलन को भुनाने की कोशिश की। राजद, जदयू, कांग्रेस, रालोसपा, हम सेक्युलर और लोजपा की कई जगहों पर होर्डिंग्स और बैनर दिखे। गांधी मैदान उत्तर जदयू ने स्वास्थ्य शिविर लगाया, तो वहीं राजद की ओर से भी कई जगहों पर लोगों को शरबत पिलाया जा रहा था।

दोपहर एक बजे अदा की नमाज

गोपालगंज, छपरा, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, हाजीपुर, समस्तीपुर, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के अलावा आरा, जहानाबाद, औरंगाबाद, पालीगंज, बिहटा, मनेर, नौबतपुर आदि जगहों से भी लोग पहुंचे थे। कुछ पर्दानसीं महिलाएं भी दिखीं। दोपहर 1 बजे जोहर की नमाज अदा की गई।

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