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आईडी के पासवर्ड बदलकर हड़ताल पर हैं 130 नरेगा कार्मिक, मनरेगा ठप

3 वर्ष पहले
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का काम पूरे जिले में ठप हो चुका है। सभी सात पंचायत समितियों में सिर्फ 1100 श्रमिक ही काम कर रहे हैं क्योंकि मस्टररोल निकालने वाला कोई कार्मिक नहीं।

हड़ताल पर गए कार्मिक मस्टररोल निकालने वाली आईडी का पासवर्ड ही बदल चुके हैं। कई दिन तक तो विभाग को पता ही नहीं लगा और जब लगा तो पासवर्ड बदलने में दिक्कत हुई। अब पासवर्ड सही कर लिए गए तो मास्टररोल निकालने वाला कार्मिक नहीं। अभियंताओं का कहना है कि अगर मस्टररोल निकाल भी लिया जाए तो बाकी कामों पर कौन नजर रखेगा। पिछले साल इन दिनों करीब 45000 कार्मिक काम कर रहे थे लेकिन इस साल सिर्फ 1100 श्रमिक ही काम कर रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में महानरेगा के तहत होने वाले कामों की गति क्या होगी। ऊपर से सरकार का दबाव कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन के तहत होने वाले काम मई तक 90 प्रतिशत पूरे किए जाएं जबकि अभी तक 50 प्रतिशत काम शुरू ही हुए हैं। सभी बीडीओ और एईएन को काम ढीला होने की वजह से नोटिस भी दिए जा चुके हैं।

ये बिलकुल सही है कि इस वक्त महानरेगा का काम लगभग ठप है। कार्मिकों का मामला राज्य सरकार स्तर पर हल होना है। मस्टररोल नहीं निकल पा रहे हैं। पासवर्ड अब कंट्रोल में कर लिए गए लेकिन मस्टररोल नहीं निकल रहे हैं। सुरेश खत्री, अधिशासी अभियंता महानरेगा

धरने पर बैठे मनरेगा कार्मिक।

सवाल- जांच के बाद

आधी क्यों हुई लेबर

भले ही अब 1100 श्रमिक काम कर रहे हों लेकिन 45 हजार से घटकर 20 हजार तक श्रमिकों की संख्या तभी पहुंच गई थी जब फर्जी मस्टररोल का मामला सामने आया था। अचानक से आधे श्रमिक गायब हो गए थे। इससे स्पष्ट है कि जिले में फर्जी मस्टररोल का खेल फल-फूल रहा है। जैसे ही जनवरी में अलग-अलग स्तर पर जांच शुरू हुई तो मार्च में श्रमिकों की संख्या 20 हजार तक पहुंच गई। अप्रैल में गर्मी की वजह से 10 हजार के नीचे आ गई और अब हड़ताल की वजह से श्रमिकों की संख्या 1100 रह गई।

ये कार्मिक हैं हड़ताल पर : ग्राम रोजगार सहायक, कनिष्ठ तकनीकी सहायक, कनिष्ठ लेखाकार, डाटा एंट्री ऑपरेटर, समन्वयक, एमआईएस मैनेजर, ब्लॉक एमआईएस मैनेजर शामिल है। खास बात ये है कि बिना डाटा एंट्री ऑपरेटर के महानरेगा की प्रगति का डाटा भी सरकार तक नहीं पहुंच पा रहा है। सरकार न तो नरेगा कार्मिकों से वार्ता कर रही है और न ही इन कार्मिकों की जगह दूसरे कार्मिकों की नियुक्ति कर रही है।

इधर सरकार के पद ही खाली

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना सरकार के ही एईएन के पद रिक्त हैं। नोखा में एक, पांचू में दो, लूणकरणसर में एक और खाजूवाला में दो अभियंताओं के पद रिक्त हैं। इस वजह से जिला परिषद ने एक ब्लॉक के अभियंताओं को दूसरे ब्लॉक के एईएन को चार्ज दिया है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि खाजूवाला में श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति के एईएन को चार्ज दिया गया जबकि पड़ोस में लूणकरणसर और कोलायत में अभियंता हैं। अभियंताओं के चार्ज में भी राजनीति हो रही है।

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