बच्चों में संस्कारों को जाग्रत करना और जीवन के व्यावहारिक आचरण के प्रति भावों को पैदा करना भविष्य को श्रेष्ठ बनाने का कदम है। यह विचार उभर कर आए जैन दर्शन संस्कार शिविर के समापन मौके पर। विकास सिरोहिया ने बताया कि श्री आत्म वल्लभ जैन पाठशाला की ओर से आयोजित प्रथम जैन दर्शन संस्कार शिविर का समापन रविवार को महावीर भवन में किया गया। जिला उद्योग संघ के महाप्रबंधक राजेंद्र सेठिया, प्रो.सुमेरचंद जैन और वल्लभ कोचर के आतिथ्य में हुए समापन समारोह में अतिथियों ने शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और शिविर में शामिल बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए। इस मौके पर प्रशिक्षक पं.कल्पेश, अश्वनी कोचर, खुश्बू सेठिया और पूला कोचर का भी सम्मान किया गया। समापन पर सुमित कोचर ने आभार जताया।
बच्चों में संस्कारों के भाव जागृत करने का किया आह्वान
शिविर में बच्चों को संस्कारवान बनने का प्रशिक्षण देते मुनिजन।
समता संस्कार शिविर आरंभ
बीकानेर बच्चों में सुसंस्कारों को जाग्रत करने के उद्देश्य से रविवार को समता संस्कार शिविर का शुभारंभ किया गया। संयोजक नवीन कोठारी ने बताया कि सेठिया कोटड़ी में प्रारंभ शिविर के पहले दिन 200 से अधिक बच्चों को संबोधित करते हुए रमेश मुनि जी महाराज ने संस्कारों की महत्ता बताई। महाराज श्री ने कहा कि जीवन में संस्कारों की आवश्यकता सर्वोपरि होती है। संस्कारों से ही जीवन में श्रेष्ठता का संचार होता है। इस मौके पर संघ अध्यक्ष मोती चंद बांठिया, जयचंद लाल सांड, इंद्र चंद दुग्गड़, सुशीला बेगानी, ललिता बांठिया और प्रीति डागा आदि मौजूद थे।