14 महीने पहले जिस पीएचसी को सरकार ने सीएचसी में क्रमोन्नत किया, वो आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है। यहां आने वाले मरीजाें को इस हॉस्पिटल में केवल एक डॉक्टर की ही सुविधा मिल पाती है। गंभीर रोगियों को तो सीधे बीकानेर या श्रीगंगानगर रेफर किया जाता है।
कस्बे की यह सीएचसी बीकानेर व श्रीगंगानगर जिले के अंतिम छोर पर है। इस कारण दोनों जिलों के सैकड़ों लोग यहां इलाज के लिए आते रहते हैं। सबसे अजीब बात यह है कि इस सीएचसी के नए भवन के लिए छह करोड़ रुपए का बजट भी जारी कर दिया मगर इसके लिए जमीन अभी तक अवाप्त नहीं की गई है। अब यह बजट लैप्स हो रहा है। इससे पहले भी भवन निर्माण के लिए मिले 28 लाख रुपए लैप्स हो चुके हैं।
प्राथमिक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनने पर केवल पुराने भवन पर नाम बदलने का ही अब तक हुआ है काम।
सीएमचओ बोले : जमीन मिलते ही शुरू कर देंगे काम
सीएमएचओ डाॅ. देवेंद्र चौधरी का कहना है कि छत्तरगढ़ के सामुदायिक हॉस्पिटल के लिए नया भवन बनाने के लिए छह करोड़ रुपए स्वीकृत हो चुके हैं। हमें तो जमीन मिलने का इंतजार है। जैसे ही हमारे विभाग को जमीन का मालिकाना हक मिलेगा, काम शुरू करवा दिया जाएगा। अगर, ऐसा नहीं हुआ तो यह बजट भी लैप्स हो सकता है।
सरपंच का जवाब : न्यायालय में विवाद के कारण नहीं दे पा रहे भूमि
सरपंच नारायण राम खिलेरी ने बताया कि ग्राम पंचायत व मंडी विकास समिति के बीच कस्बे की भूमि को लेकर न्यायालय में विवाद चल रहा है। ऐसे में हमारे पास भूमि देने का अधिकार नहीं है। इसी कारण कस्बे का विकास रुका हुआ है। सीएचसी की स्वीकृति के साथ बजट है, जमीन भी है मगर मालिका हक हम नहीं पा रहे, इसी कारण लोग परेशान है।
अगर नया भवन बने तो 30 बेड के साथ 36 प्रकार की जांच यहीं हो जाएगी : पीएचसी से सीएचसी बनने के बाद हॉस्पिटल की सेवाओं में विस्तार होगा। 30 बेड की सेवाएं यहां रोगियों को मिल सकेगी यानी 30 रोगियों को 24 घंटे भर्ती कर इलाज देने की सुविधा मिलेगी। इसी प्रकार 36 प्रकार की जांच इसी हॉस्पिटल के लैब में हो सकेगी। आठ सीनियर और जूनियर डॉक्टर हर वक्त मिलेंगे। जीएनएम, एएनएम के साथ अन्य पदों पर भी भर्तियां अधिक होगी।
स्टाफ की कमी के कारण नहीं मिल रहा ग्रामीणों को योजनाओं का लाभ : सीएचसी बनने के बाद भी यहां स्टाफ की वृद्धि नहीं की गई। पीएचसी वाले स्टाफ के दम पर सीएचसी में एक रोगी को मिलने वाली सरकारी योजनाएं यहां देनी संभव नहीं हो रही। इस कारण रोगियों को काफी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। सर्दी, जुकाम, बुखार के अलावा अन्य जो भी रोगी आता है उसे रेफर ही किया जाता है।