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सब जगह गुहार लगा चुके ग्रामीणों ने अाखिरकार खुद बनाई 3 किमी की ग्रेवल रोड

3 वर्ष पहले
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शहर से सटता कानासर गांव। गांव को जेएमडी नहरी आबादी इलाके को जोड़ने वाली संपर्क सड़क, जो ग्रेवल है और 10 सालों से जर्जर पड़ी है। 3 किमी का सफर गाड़ी में तय करने में भी लगता है कम से कम 30 मिनट का समय। पल-पल गड्‌ढ़ों में उछलते वाहन। इतनी मुश्किलों भरे सफर से परेशान गांव के लोगों ने सांसद, विधायक और सरपंच आैर जिला प्रशासन से ग्रेवल सड़क को नई बनवाने की बार-बार गुहार की लेकिन अब कोई राहत नहीं मिली तो उन्होंने अपने स्तर पर एक ही दिन में सड़क बना ली। इस पर खर्च भी ट्रैक्टरों के पेट्रोल, डीजल भरवाने और जेसीबी का किराया चुकाने का ही लगा। वह भी ग्रामीणों ने अपने स्तर पर वहन किया।

ग्रेवल सड़क बनाने का काम रविवार सुबह शुरू किया गया जो रात 10 बजे तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान 35 ट्रैक्टर, एक जेसीबी मशीन और 50 ग्रामीण इस काम में जुटे रहे। गांव के राजू यादव, हीरालाल यादव और विकास राजपुरोहित ने बताया कि ग्रामीणों के चार दल सड़क पर मिट्‌टी जमाने के काम में लगे। वहीं कुछ ग्रामीण ट्रैक्टरों से मिट्‌टी और कांकर लाने में।

कानासर से जेएमडी नहरी आबादी तक जाने वाली 6 किमी रोड में 3 किमी ग्रेवल सड़क एक दशक से थी जर्जर

नौ किमी की रोड़ में तीन किमी डामर रोड, तीन किमी के लिए विधायक ने भरी हुई है हामी, मनरेगा में होगा काम

कानासर से जेएमडी की 9 किमी लंबी रोड में तीन किमी रोड़ तो पक्की बनी हुई है। सरपंच सरोजदेवी के प्रतिनिधि हिम्मतसिंह राजपुरोहित ने बताया कि जो तीन किमी की रोड ज्यादा जर्जर है उसके लिए विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने हामी भरी हुई है। इसके लिए प्रस्ताव भी बनाकर भेजे हुए हैं। मंजूर होते ही काम शुरू करवा देंगे।

कानासर से जेएमडी की तीन किमी रोड का काम मनरेगा में होना है। इसके प्रस्ताव बनाकर भेजे हुए हैं लेकिन मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल के चलते एक महीने से कोई भी काम नहीं हो रहा। यहां तक की मस्टरोल भी नहीं भरे जा रहे हैं। हड़ताल खत्म होने के बाद ही काम शुरू हो सकेगा। - चिरंजी शर्मा, ग्रामसेवक कानासर

ग्रेवल सड़क के तैयार होने पर जीत का मुद्रा में कानासर के ग्रामीण।

ग्राम पंचायत काम करवाती तो खर्च होते करीब 22 लाख रुपए

ग्रेवल सड़क का काम अगर विधायक निधि या ग्राम पंचायत करवाता तो करीब 22 लाख रुपए खर्च होते। ग्रामीणों का कहना है कि 2016-17 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट में गांव में ही राउमावि से भैरुंजी मंदिर तक एक किमी की ग्रेवल सड़क का काम 7 लाख 35 हजार रुपए में करवाया। इस लिहाज से अगर इस रोड पर काम होता तो करीब 22 लाख रुपए खर्च होते। इसके अलावा करीब 15 दिन का समय लगता जबकि ग्रामीणों ने इसे एक ही दिन में और महज कुछ लाख रुपए खर्च करके पूरा कर लिया।

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