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वेटरनेरी डॉक्टर्स के 60 फीसदी पद खाली, पांच साल से नहीं हुई भर्ती

3 वर्ष पहले
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राज्य के पशुपालन विभाग में वेटरनेरी डॉक्टर्स के 60 फीसदी पद खाली चल रहे हैं।

बावजूद इसके पिछले पांच साल में इन पदों को भरने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने 2017-18 के बजट में वेटरनेरी डॉक्टर्स के 900 पदों पर भर्ती की घोषणा की थी लेकिन इसकी क्रियान्विति अभी तक नहीं हो पाई है। नई भर्ती में हो रहे विलंब और रिक्त पदों के चलते सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ पशुपालकों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं पशुओं का समय पर उपचार भी नहीं हो रहा है। रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग को लेकर वेटरनेरी डॉक्टर्स संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधि मंडल मंगलवार को जिला कलेक्टर से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर को सीएम और पशुपालन मंत्री के नाम का ज्ञापन देकर रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग रखी। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सीएम की घोषणा के बाद पशुपालन मंत्री, पशुपालन शासन सचिव सहित विधायक और सांसदों से मिलकर भर्ती प्रक्रिया शुरू करवाने की मांग कर चुके है मगर अभी तक सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। प्रतिनिधि मंडल में डॉ.पंकज मंगल, डॉ.तुषार महर्षि, डॉ.ओमप्रकाश बुड़ानिया, डॉ.लूणाराम भांभू आदि शामिल हुए।

पदों की स्थिति

1944 स्वीकृत

870 कार्यरत

1074 रिक्त

वेटरनरी डॉक्टर्स के रिक्त पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है। डॉ.अजय गुप्ता, निदेशक, पशुपालन

वेटरनरी डॉक्टर्स के पदों पर पिछले पांच साल से भर्ती नहीं हुई है। प्रदेश में 60 फीसदी पद खाली है। सीएम घोषणा के बाद भी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होना खेद का विषय है। डॉ.पंकज मंगल, प्रदेशाध्यक्ष, वेटरनेरी डॉक्टर्स संघर्ष समिति

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