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भीड़ से घिरे डाक्टर एक मिनट में कर रहे इलाज, तनाव से खुद बीमार

3 वर्ष पहले
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छत्तरगढ़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र यानी सीएचसी। बीते सालभर में यहां 70,580 रोगी आउटडोर में पहुंचे और 852 रोगियों का भर्ती कर इलाज किया गया। छुट्टियां, कैंप ड्यूटी, हाफ-डे आदि मिलाकर पूरे साल में औसतन 260 दिन फुल-डे चलने वाले हॉस्पिटल में नियुक्त इकलौता डाक्टर एक दिन में औसतन 196 रोगियों को देखता है। ऐसे में यहां नियुक्त इकलौता डाक्टर हर रोगी को औसतन 1 मिनट नौ सैकंड ही दे पाया। इतने कम समय में मरीज का नाम पूछने, हाल जानने, बीपी मापनेे, स्टेथ से दिल की धड़कन सुनने और पर्ची पर दवाई लिखने तक सारा काम हुआ। मरीज को अपनी तकलीफ बताने और डाक्टर को बीमारी समझकर उपचार करने में जो वक्त लगा उससे जहां ट्रीटमेंट की क्वालिटी जाहिर होती है वहीं डाक्टर पर मरीजभार के तनाव का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

बीकानेर जिले में पीएचसी से लेकर जिला हॉस्पिटल तक के 87 सरकारी हॉस्पिटलों की जो सालाना रिपोर्ट हैं वह बताती है कि छत्तरगढ़ जैसे ही 15 हॉस्पिटल ऐसे हैं जहां मरीज-डाक्टर के बीच ट्रीटमेंट को लेकर बिताया गया औसतन समय दो मिनट से कम हैं। जिले की सभी 16 सीएचसी और 17 अर्बन पीएचसी का मरीज-डाक्टर रेशियो बताता है कि डाक्टर एक रोगी को औसतन ढाई मिनट ही दे पाता है। इससे इतर पीएचसी में मरीजभार अपेक्षाकृत कम होने के कारण एक मरीज को औसतन पांच मिनट का समय मिल जाता है। जिला हॉस्पिटल में भी एक मरीज को लगभग पांच मिनट का समय मिलता है लेकिन यह स्थिति मरीज ज्यादा होने के साथ ही 23 डाक्टर की मौजूदगी के कारण हो पाता है।

सालों-साल बदल रहे हालात
वर्ष 2017 की रोगी-हॉस्पिटल स्टडी का बीते साल 2016 से तुलना करें तो पता चलता है कि सालोंसाल हालात बदतर ही हो रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में :

2.32 फीसदी आउटडोर और 12.80 फीसदी इनडोर रोगी बढ़े।

2.55 फीसदी पेशेंट लोड प्रति दिन बढ़ा और प्रति रोगी ट्रीटमेंट कोस्ट में 1.94 रुपए की लागत कम हुई।

8 फीसदी घट गई डाक्टर्स की संख्या।

10.38 फीसदी घट गया मरीजों को दिया जाने वाला डाक्टर्स का टाइम।

वर्षभर में पीएचसी से लेकर जिला हॉस्पिटल तक पहुंचने वाले रोगी, उन पर लगने वाला वक्त, नियुक्त डाक्टर, दी जाने वाली दवाई आदि की डिटेल रिपोर्ट हर साल बनाई जाती है। बीते साल की भी बनी है। इससे तो संकेत मिलते हैं उसी अनुरूप अपने स्तर पर जो सुधार संभव हैं वे करते हैं। सरकार को भी रिपोर्ट भेजते हैं। डा.देवेन्द्र चौधरी, सीएमएचओ

87 हॉस्पिटल्स की रिपोर्ट
3618276 आउटडोर रोगी देखे पूरे साल में। 89068 रोगियों को भर्ती कर इलाज किया। 10157 रोगी औसतन प्रतिदिन देखे गए। 27.21 रुपए की दवाई औसतन प्रत्येक रोगी को दी गई। 159 डाक्टर्स ने इन सभी रोगियों का उपचार किया। 3 मिनट 35 सैकंड का समय औसतन एक रोगी को मिला।

डाक्टर्स को घेर रही बीमारियां
बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग की ओर से की गई एक स्टडी बताती है कि अत्यधिक कार्यभार की वजह से डाक्टर बीमार हो रहे हैं। उनमें बीपी, शुगर, हार्ट जैसी बीमारियों की आशंका बढ़ी है वहीं डिप्रेशन का शिकार भी हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डा.आर.पी.अग्रवाल की देखरेख में की गई यह स्टडी कार्यस्थल पर खुशनुमा माहौल बनाने की सिफारिश करती है। डा.अग्रवाल कहते हैं, यह बड़ी अलार्मिंग स्टडी है जिसके आधार पर हमने सुधार के प्रयास भी किए हैं।

डाक्टर-पेशेंट रेशियो बेहद चिंताजनक हो रहा है। इसके साथ ही कार्यस्थल पर तनाव की घटनाएं बढ़ रही है। ऐसी स्थिति मरीज, डाक्टर, प्रशासन किसी के लिए भी ठीक नहीं है। कॉलेज में हमने जो स्टडी की है, उससे मिले संकेतों के बाद यंग डाक्टर्स के लिए खेल, मनोरंजन, खुले व्यवहार और निरंतर संवाद जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं। डा.आर.पी.अग्रवाल, प्राचार्य एसपी मेडिकल कॉलेज

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