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पीएचईडी ने शहर में पानी जांचने के लिए उतारी टीमें 15 एमएलडी प्रोडक्शन कम

3 वर्ष पहले
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जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में प्रदर्शन करते लोग।

सिटी रिपोर्टर | बीकानेर

शहर में बदले रंग के साथ पानी की जलापूर्ति की खबर के बाद मंगलवार को पीएचईडी ने कई टीमें शहर में उतारी हैं। टीमें ऐसी जगहों से पानी के सैंपल लेकर जांच कर रही है जहां पानी का रंग बदला हुआ है। नहरबंदी के बाद से ही शहर में गंदे पानी की शिकायतें उठ रही थी लेकिन दो दिन से ये समस्या और गहरा गई। लोगों ने सोमवार को पीएचईडी से इसकी शिकायत की। मीडिया में भी इसकी खबर उठी। उसके बाद पीएचईडी विभाग हरकत में आया। शहर के करीब 12 जगह से पीएचईडी ने सैंपल लिए। कई जगह मौके पर ही सैंपल की जांच हुई तो कुछ सैंपल पीएचईडी के लेबोरेट्री कर्मचारी साथ लेकर गए हैं। मंगलवार को भी लोगों ने पानी की बोतलों में भरकर मीडिया को दिखाई। हालांकि पानी साफ था लेकिन पानी से बदबू आ रही थी। शिकायतें बढ़ती देख अतिरिक्त मुख्य अभियंता वी.कृष्णन भी शोभासर जलाशय पहुंचे। लेबोरेट्री से टीम भी यहां पहुंची। पानी की गुणवत्ता जांची। हालांकि मानक पैमाने पर अभी भी पानी ठीक बताया जा रहा है लेकिन लोग अभी भी हैरान हैं।

क्वालिटी बढ़ाने के लिए घटाई क्वांटिटी : पानी की क्वालिटी बढ़ाने के लिए पीएचईडी ने पानी की क्वांटिटी कम कर दी है। कटौती के बाद शोभासर जलाशय से 75 एमएलडी पानी फिल्टर हो रहा था लेकिन गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अब 60 एमएलडी पानी फिल्टर किया जा रहा है ताकि जो पानी फिल्टर हो वो पूरी तरह साफ हो।

इधर, उदयरामसर में टंकी पर चढ़े लोग

कई दिनों से उदयरामसर के लोग पानी के लिए परेशान है। वजह गांव के दो कुओं के पानी का मिलान होना था। इसके लिए पीएचईडी को एक वाल्व लगाना था जो चार दिन बीतने के बाद भी नहीं लगाया। गुस्से में आए लोग टंकी पर आए और ऊपर चढ़ने लगे। 20 सीढ़ियां चढ़कर बीच में ही बैठकर पीएचईडी के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। अजयसिंह यादव, पवन, वीर बहादुर, रूपाराम, मूलचंद, पप्पू सुथार, सुखराम, लिखमाराम समेत कई लोगों की बाद में एक्सईएन विजय वर्मा से बातचीत हुई। बुधवार को काम पूरा होने का वादा मिलने पर लोग टंकी से उतरे। इंडियन यूथ पावर के बैनर तले भी लोगों ने पीएचईडी कार्यालय का घेराव कर वार्ड नंबर एक, छह, 47, 48, 27 आदि में पानी की किल्लत बताई। अधिशासी अभियंता को ज्ञापन सौंपकर समस्या का निदान करने की मांग की। पावर के संरक्षक अब्दुल रहमान और संयोजक अविनाश राठौड़ मौजूद थे।

क्या पानी की मानक

और क्या मिल रहा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिसाब से पीने का पानी अधिकतम 500 टोटल डिजाल्व सॉलिड तक होना चाहिए और मंगलवार को 170 टीडीएस मानक का पानी सप्लाई किया गया। जो सामान्य श्रेणी में बताया जा रहा है। रही बात रंग की तो पांच एनपीयू तक होना चाहिए और ये भी पांच एनपीयू तक ही है। लेबोरेट्री के तकनीकी अधिकारी मनोज शर्मा का कहना है कि रंग काई का है। जो पानी सूखने का बाद सूख जाती है लेकिन पानी आते ही उसमें घुल गई। इस वजह से रंग बदला हुआ है लेकिन हानिकारक तत्व पानी में अभी नहीं है। पानी की गुणवत्ता मानकों के आधार पर ही है फिर भी पानी के रंग और अगर कहीं बदबू आ रही है तो उसे ठीक कर लिया जाएगा।

पानी कई जगह चैक कराया है। शोभासर जलाशय से पानी फिल्टर करने के बाद वहां भी गुणवत्ता चैक कराई जा रही है ताकि तुलना कर सकें कि जो पानी भेजा जा रहा है वही पानी लोगों तक पहुंच रहा या बीच में कोई दिक्कत है। मेरी पूरी टीम लगी हुई है और कोशिश है कि गुणवत्ता ठीक हो। वी.कृष्णन, अतिरिक्त मुख्य अभियंता पीएचईडी

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