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फोकस बढ़ाना है तो एक दिन रहें पहुंच से बाहर

3 वर्ष पहले
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कार्यस्थल पर लगातार मीटिंग्स का आपकी उत्पादन क्षमता पर असर पड़ता है। खुद को समय देने और फोकस बनाने के लिए हफ्ते में एक ऐसा दिन जरूर निकालें जब आपको कोई परेशान नहीं करे। इस दिन कोई टेक्स्ट नहीं, कोई ईमेल नहीं, फोन नहीं और न ही कोई मीटिंग हो। कैलेंडर पर यह दिन ब्लॉक कर दें और साथियों को बताएं कि जरूरी प्रोजेक्ट की वजह से आप इस दिन पहुंच से दूर रहेंगे। जब तक कोई अत्यंत जरूरी काम न आए तब तक किसी प्रकार का समझौता न करें। अपना फोकस बनाए रखने के लिए यह दिन रुटीन में लाना जरूरी है। यही आपके और आसपास के लोगों के लिए बेहतर होगा।

(स्रोत: व्हाय यू नीड एन अनटचेबल डे एवरी वीक, नील पसरीचा)



जरूरी काम करने के लिए एक नहीं तीन सूचियां क्यों होनी चाहिए, ये जानते हैं हार्वर्ड बिज़नेस रिव्यू से।

हफ्ते में एक दिन पहुंच से बाहर रहना भी जरूरी
हफ्ते में एक दिन पहुंच से बाहर रहना भी जरूरी
कार्यस्थल पर लगातार मीटिंग्स का आपकी उत्पादन क्षमता पर असर पड़ता है। खुद को समय देने और फोकस बनाने के लिए हफ्ते में एक ऐसा दिन जरूर निकालें जब आपको कोई परेशान नहीं करे। इस दिन कोई टेक्स्ट नहीं, कोई ईमेल नहीं, फोन नहीं और न ही कोई मीटिंग हो। कैलेंडर पर यह दिन ब्लॉक कर दें और साथियों को बताएं कि जरूरी प्रोजेक्ट की वजह से आप इस दिन पहुंच से दूर रहेंगे। जब तक कोई अत्यंत जरूरी काम न आए तब तक किसी प्रकार का समझौता न करें। अपना फोकस बनाए रखने के लिए यह दिन रुटीन में लाना जरूरी है। यही आपके और आसपास के लोगों के लिए बेहतर होगा।

(स्रोत: व्हाय यू नीड एन अनटचेबल डे एवरी वीक, नील पसरीचा)

सहकर्मियों से प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग कीजिए
सहकर्मियों से प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग कीजिए
अत्यंत प्रतिस्पर्धी संस्थानों में कर्मचारियों पर अपने साथियों से बेहतर करने का दबाव बना रहता है। बेहतरीन असाइनमेंट्स और प्रमोशन के सीमित अवसर दांव पर होते हैं। लेकिन ये स्वस्थ वातावरण एक क्रूर परंपरा को जन्म देता है और आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने से रोकता है। सहकर्मियों से प्रतिस्पर्धा करने की बजाय सामंजस्य बैठाने का प्रयास करें। अगर किसी प्रोजेक्ट को संभालने के बाद आपको खराब फीडबैक मिला था, तो हो सकता है ये आप किसी के साथ शेयर करना न चाहें। लेकिन साथियों से शेयर करते हैं तो वे भी आपसे जरूरी जानकारियां शेयर करेंगे।

(स्रोत: व्हेन इट पेज़ टू कोलैबोरेट विद कॉम्पिटिटर्स

एट वर्क, डैनियल रेनॉल्ड्स और डूग मेयर)

अत्यंत प्रतिस्पर्धी संस्थानों में कर्मचारियों पर अपने साथियों से बेहतर करने का दबाव बना रहता है। बेहतरीन असाइनमेंट्स और प्रमोशन के सीमित अवसर दांव पर होते हैं। लेकिन ये स्वस्थ वातावरण एक क्रूर परंपरा को जन्म देता है और आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देने से रोकता है। सहकर्मियों से प्रतिस्पर्धा करने की बजाय सामंजस्य बैठाने का प्रयास करें। अगर किसी प्रोजेक्ट को संभालने के बाद आपको खराब फीडबैक मिला था, तो हो सकता है ये आप किसी के साथ शेयर करना न चाहें। लेकिन साथियों से शेयर करते हैं तो वे भी आपसे जरूरी जानकारियां शेयर करेंगे।

(स्रोत: व्हेन इट पेज़ टू कोलैबोरेट विद कॉम्पिटिटर्स

एट वर्क, डैनियल रेनॉल्ड्स और डूग मेयर)

, बीकानेर, रविवार, 8 जुलाई, 2018

मैक्सिको में हर 15 मिनट में एक हत्या, पुलिस की कमी, सेना तैनात
सियारा नगंेट

मैक्सिको अपने सर्वाधिक रक्तरंजित दौर में है। हर 15 मिनट में देश में एक न एक हत्या हो ही जाती है। पिछले कुछ वर्षों से चल रहा ये सिलसिला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। पिछले दो माह में तो इतनी हत्याएं हो गई हैं कि दुनिया का ध्यान चला गया। मई में ही 29, 168 लोगों की हत्या कर दी गई। यह सरकार नहीं कर रही, वरन अराजक स्थित के कारण वहां ऐसा हो रहा है।

पिछले दिनों यहां हुए चुनाव में भी प्रमुख मुद्दा यही था। आपसी रंजिश के अलावा कई अन्य प्रकार के अपराधों में भी हत्याएं हो रही हैं। राजनेता भी नहीं छोड़े जा रहे हैं। पिछले दिनों चुनाव में यहां पर 130 राजनेताओं की हत्या कर दी गई, इसमें से 48 तो पहले से चुने हुए नेता थे। हत्याओं का सिलसिला सितंबर से तेजी से बढ़ा है। राजनीति परामर्श देने वाली फर्म एटेलेक्ट का कहना है कि इसके बाद इसमें कमी नहीं आई। इन हत्याओं के पीछे ये कारण सामने आ रहे हैं-

पुलिस की कमी: मैक्सिको में पुलिस की काफी कमी है। अभी भी देश में 1 लाख 16 हजार रिक्तियां पुलिस विभाग में मौजूद है। सरकारी सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि देश में पुलिस की संख्या जरूरत से आधी ही है। क्यों खाली हैं पद? तो इसका जवाब मिलता है कि सैलरी बहुत ही कम है। पुलिस में औसत वेतन 480 डॉलर प्रतिमाह ही है। यह राष्ट्रीय स्तर पर दी जाने वाली मजदूरी के औसत से भी कम है। यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका में सिक्युरिटी पढ़ाने वाले प्रोफेसर गेरार्डो रॉड्रिग्स का कहना है कि यहां पर पुलिस का कॅरियर प्रोफेशनल के समान नहीं है। दरअसल, यहां पर ड्रग्स का काम इतना प्रभावी है कि कोई मुकाबला नहीं रहता है। इस वजह से मजबूरी में मैक्सिको की सरकार को सड़कों पर सेना लगाना होती है, ताकि हालात पर काबू किया जा सके। सेना लगाने का काम दिसंबर 2006 से जारी है। तब तत्कालीन राष्ट्रपति फिलिप कॉलडेरॉन ने ड्रग्स के खिलाफ जंग छेड़ दी थी।

गैंग्स नए इलाकों में सक्रिय : तमाम गिरोह ड्रग्स का काम करते रहे, अब वे टुकड़ों में बंट गए हैं और अलग-अलग जगहों से काम कर रहे हैं। यह सही है कि ड्रग माफिया पकड़ा जा चुका है, लेकिन इसके बाद भी यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। और तो और इन्होंने आपने कामकाज को और वृहद रूप दे दिया है। पकड़े जा चुके अल चापो गुजमैन के कुख्यात सिनालोआ कार्टेल ने बड़े पैमाने पर फिंटानाइल में निवेश कर दिया है। यह एक सिंथेटिक नशा है, जो हेरोइन से 50 गुना ज्यादा नशा देता है। कुछ गैंग अवैध तेल उत्खनन में है। पिछले पांच साल में यह तेल उत्खनन 790 फीसदी बढ़ गया है। हर 90 मिनट में देश में कहीं न कहीं तेल की चोरी हो ही जाती है। चूंकि तुरंत पैसा मिलता है, इसलिए कई लोगों को आपराधिक कामों में ही रोजगार मिला है।

राजनीतिक हत्याएं: पिछले वर्ष जून में पुएब्ला राज्य से 12 मेयर को तेल की चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद से हत्याएं बढ़ गई हैं। 2012 से लेकर 2018 के बीच में राजनेताओं की हत्याएं 2400 फीसदी बढ़ चुकी हैं। एटेलेक्ट के प्रमुख रूबेन सालाजार कहते हैं कि अपराधी भी राजनीति में आ चुके हैं। सरकार का स्थानीय स्तर पर नियंत्रण नहीं रह गया है। 25 जून को मेयर पद के प्रत्याशी की हत्या के बाद राज्य पुलिस ने ओकेम्पो शहर की पुलिस के सारे हथियार छीन लिए। नए राष्ट्रपति को 1 दिसंबर को शपथ लेना है, लेकिन तब तक हालात काबू करने के कोई आसार नहीं हैं।

राजनीतिक विचारों को सेंसर कर रही हैं टेक कंपनियां!
क्या टेक्नोलॉजी कंपनियां राजनीतिक रुझान या विचारों को सेंसर करती हैं? शायद इसके उत्तर को लेकर दुविधा हो, लेकिन 72 फीसदी अमेरिकी यह मानते हैं कि सोशल मीडिया के जितने भी प्लेटफॉर्म हैं, वे इस तरह की सेंसरशिप कर रहे हैं। जो भी इन कंपनियों को आपत्तिजनक लगता है, वे इसे रोक देती हैं।

ऐसा कोई कह नहीं रहा, वरन प्यू रिसर्च द्वारा कराए गए एक अध्ययन में यह पता चला है। अमेरिकियों की टेक्नोलॉजी के प्रति क्या राय है, इस पर प्यू ने 4594 वयस्कों से कुछ सवाल पूछे। यह नेट न्यूट्रलिटी और टेक प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव को लेकर थे। इस अध्ययन में पता चला कि 40 फीसदी अमेरिकी यह मानते हैं कि टेक कंपनियां कंजरवेटिव्स की बजाय लिबरल्स का ज्यादा समर्थन करती हैं। 11 फीसदी इसका ठीक उलटा मानते हैं। जबकि 72 फीसदी मानते हैं कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन राजनीतिक विचारों को सेंसर कर दिया जाता है, जो आपत्तिजनक होते हैं। यह चौंकाने वाली बात इस लोकतांत्रिक देश में सामने आई है। दो-तिहा ईतो यह कहते हैं कि टेक कंपनियां इस बात का आकलन तक नहीं कर सकती कि उनके प्रोडक्ट और उनकी सेवाएं किस तरह से समाज को प्रभावित करेंगी। रिसर्चर आरोन स्मिथ कहते हैं टेक्नोलॉजी कंपनियों की भूमिका को लेकर लोगों की राय को लेकर कई बहस हैं। लगभग आधे अमेरिकी यह मानते हैं कि टेक कंपनियों को और ज्यादा नियंत्रण में रखे जाने की जरूरत है।

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