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क्लास रूम में कबाड़, लॉबी में पक रहा पोषाहार बदहाली से जूझ रही प्रारंभिक-माध्यमिक शिक्षा

3 वर्ष पहले
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मिड डे मील जांच का सिलसिला मंगलवार से शुरू हो गया। दो दिन मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की होने वाली जांच को लेकर भास्कर टीम अधिकारियों के साथ कुछ स्कूलों में पहुंचा तो हालात ठीक नहीं मिले। हालांकि कहीं पोषाहार की क्वालिटी चैलेंज नहीं हुई, लेकिन किराए के भवनों में चल रहे ज्यादातर स्कूलों में रसोईघर सिर्फ फार्मेलिटी है। कमरों में कबाड़ भरा है तो किचन लॉबी में शिफ्ट कर दी गई। किराए के ज्यादातर स्कूलों में रसोई जुगाड़ से ही पक रही है। दूसरी बात, स्कूलों में बच्चों के पढ़ने के लिए जगह भी बहुत तंग है। ऐसे स्कूल भी देखने में आए, जहां कई-कई क्लास एक साथ लॉबी में ही लग रहे हैं। बिल्डिंग क्षतिग्रस्त, टूटा फर्श, दीवारों में दरारें...सरकारी स्कूलों में ये तस्वीर तो आम ही है। इन स्कूलों में आरटीई के मुताबिक सुविधाओं की बात तो बेमानी ही है। मंगलवार को मिड-डे-मील के औचक निरीक्षण अभियान के तहत जब शिक्षाधिकारी स्कूलों में पहुंचे तो ऐसी कई समस्याएं मिलीं। कहीं क्लास में तो कहीं लॉबी में पोषाहार पकाया जा रहा है। स्कूल के लिए सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने से मजबूरन क्षतिग्रस्त भवनों में ही पढ़ाई हो रही है।

इन 3 उदाहरण से जानिए...किराए के भवनों में स्कूलों का कितना बुरा हाल

केस-एक : राउप्रावि कोरिया का बास नंबर 1 स्कूल में 107 बच्चों का नामांकन है। पढ़ाई के लिए तीन कमरे। एक कमरे में कबाड़ भरा है, पोषाहार बाहर लॉबी में पकाया जा रहा है। एक कक्ष में तीन क्लास लगते मिले।

केस-दो : राउप्रावि इंद्रा कॉलोनी कृषि मंडी में 95 स्टूडेंट्स। क्लास रूम केवल तीन। एचएम सहित सात शिक्षकों का स्टाफ। क्लास रूम के अभाव में कई क्लासें बरामदे में लगी।

केस-तीन : राउप्रावि कमला कॉलोनी में 140 बच्चों का नामांकन है। यहां कमरे चार हैं। किचन और खाद्यान्न का भंडार एक ही है। दो मंजिल बिल्डिंग में जगह नहीं होने से बच्चों को एक साथ पोषाहार नहीं खिलाया जा रहा।

282 में किचन नहीं, जुगाड़ से पकाते हैं

बीकानेर में प्रारंभिक सेटअप के 1987 स्कूलों में 28 स्कूल किराए के भवन में चल रहे हैं। जबकि 282 प्राथमिक-उच्च प्राथमिक स्कूलों में किचन नहीं है। रसोईघर के अभाव में इन स्कूलों में बच्चों के लिए पोषाहार कक्षा-कक्ष या बाहर बरामदे में पकाना पड़ रहा है। स्कूल भवन स्वयं का नहीं होना, बजट का अभाव व कोर्ट केस प्रमुख कारण हैं।

आरटीई के तहत प्रत्येक स्कूल में नाॅर्म्स के मुताबिक रसोईघर होना चाहिए। जिन स्कूलों में रसोईघर नहीं हैं, वहां के संस्था प्रधानों को संबंधित अधिकारी को तुरंत प्रस्ताव भिजवाकर रसोईघर की व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए हैं। - सुनील बोड़ा, एडीईओ, माध्यमिक

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