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समय पर प्रोजेक्ट रिवाइज नहीं, पौधरोपण बंद

3 वर्ष पहले
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बीकानेर| बारिश का जितना इंतजार आमजनों को होता है, उससे कहीं ज्यादा वन विभाग के अधिकारियों को रहता है। ताकि वे मानसून की बारिश में पौधरोपण कर सकें।

इस साल मानसून की शुरुआत में ही अच्छी बारिश हो गई, इसके बावजूद वन अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। क्योंकि, इस बार पौधरोपण का कोई काम नहीं बचा। जापान के सहयोग से राजस्थान वानिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी का जो प्रोजेक्ट चल रहा था, वो पिछले साल ही खत्म हो गया। पौधरोपण के लिए अब न तो केन्द्र की कोई बड़ी स्कीम बची और न ही राज्य की। ऑन गोइंग कैंपा और जलवायु परिवर्तन के जो दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उसी में सिर्फ 80 हैक्टेयर में पौधरोपण का काम होगा। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में पौधरोपण कर वन अधिकारी अपनी प्रोग्रेस दिखा रहे हैं। कैंपा स्कीम में वहीं पौधरोपण होता है, जहां पुराने पेड़ों की कटाई होती है। इसमें भी दो पौधों के बीच की दूरी ज्यादा होती है। जलवायु परिवर्तन में 80 हैक्टेयर में पौधरोपण होगा।, वानिकी प्रोजेक्ट में छह से 10 हजार हैक्टेयर तक में पौधरोपण होता आया है।

ये सही है कि प्रोजेक्ट पिछले साल खत्म हो गया। उसका दो साल का रिवाइज करने का प्लान है लेकिन अभी तक उसका फैसला नहीं जयपुर से नहीं हुआ। उम्मीद है कि दो साल के लिए उसका एक्सटेंशन मिलेगा। इस साल एमजेएसए, जलवायु परिवर्तन और कैंपा स्कीम में ही पौधरोपण होगा। बी.आर.भादू, मुख्य वन संरक्षक बीकानेर

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