अनेकी की दीवार... सेवाभाव का यूं हो रहा दुरुपयोग
सर्किट हाउस के सामने बनी नेकी की दीवार में बेतरतीब पड़े कपड़े। लक्ष्मीनाथ मंदिर में बनी नेकी की दीवार के पास बिखरे पड़े कपड़े।
सिटी रिपोर्टर | बीकानेर
हर जरूरतमंद को तन ढकने के लिए कपड़े मिले। सेवा की इसी सोच के साथ अन्य शहरों की तर्ज पर बीकानेर में भी यूआईटी और सेवाभावी संस्थाओं ने नेकी की दीवारें स्थापित की। व्यवस्था ये थी की जिनके पास जरूरत से ज्यादा अनावश्यक कपड़े हैं वो यहां रख दें। ताकि जरूरतमंद लोगों को तन ढकने के लिए कपड़े मिल सकें। शुरु के दिनों में ये व्यवस्था सही ढंग से संचालित भी हुई।
अब इसे संभालने वाला कोई नहीं है। नेकी की दीवारों और इनके आसपास बेतरतीब ढंग से कपड़े बिखरे रहते है। कपड़े छांटने वाले लोग सड़कों पर कपड़े फेंकने लगे हैं। लक्ष्मीनाथ मंदिर, सर्किट हाउस और पब्लिक पार्क स्थित शनि मंदिर के बाहर स्थापित इन दीवारों के यही हालात हर रोज देखने को मिलते हैं।
लग्जरी गाड़ियों में सवार लोग नीचे उतरकर कपड़ों की गठरी रखने के बजाय दूर से ही फेंकते हैं, जिससे कपड़े बाहर की बिखर जाते हैं। यूआईटी ने अपनी दीवार को हालांकि कवर्ड भी किया है, लेकिन वह स्थान भी भर चुका है। चेयरमैन महावीर रांका का कहना है कि शहर में अभी चार और स्थानों पर ऐसी दीवार बनानी है। इसके लिए उपयुक्त स्थान की तलाश है।