अधिक मास शुरू, एक माह नहीं होंगे मांगलिक कार्य
बीकानेर| भगवान सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के साथ ही बुधवार को 32 महीने, 16 दिन और चार घड़ी के अंतर के बाद अधिक मास (पुरुषोत्तम मास)शुरू हो गया। इस मास के साथ ही नगर में जहां दान-पुण्य के दौर भी शुरू हो गए वहीं जगह-जगह भागवत कथाओं के आयोजन होने लग गए। 16 मई से शुरू हुआ अधिक मास 13 जून तक रहेगा।
अधिक मास शुरू होने के साथ अब एक माह तक मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा के अनुसार अधिक मास में फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले प्राय: सभी काम वर्जित होते हैं, और फल की इच्छा के बिना किए गए सभी कार्य किए जा सकते हैं। इसके विपरीत ऐसे कार्य जो अधिक मास से पहले शुरू हो चुके हैं उन कार्यों की समाप्ति अधिक मास में हो सकती है। मन्नासा के अनुसार अधिक मास में भगवान कृष्ण के निमित जो व्रत, उपवास, दान, पूजा आदि किए जाते हैं उन सबका अक्षय फल मिलता है। अधिक मास में जहां एक ओर राजनेताओं अपदस्थ होने के साथ ही हिंसक घटनाओं के योग भी बनेंगे वहीं दूसरी ओर अच्छी फसल व अच्छी वर्षा के योग भी बनेंगे। मन्नासा के अनुसार अधिक मास में विष्णु पूजन, पुरुषोत्तम माहात्मय पाठ, भागवत पुराण, विष्णु स्रोत आदि का महत्त्व अधिक हो जाता है।
अधिक मास में ये कार्य
रहेंगे वर्जित
अधिक मास में कुएं, बावड़ी, तालाब, बाग आदि का आरंभ के साथ ही नव वधू का प्रवेश, पृथ्वी, तुला आदि दान, सोम यज्ञ, अष्ट का श्राद्ध, गो का दान, देवताओं की स्थापना, दीक्षा, विवाह, मुंडन, संन्यास आदि कार्य अधिक मास में वर्जित रहते हैं।
ये कार्य कर सकते हैं अधिक मास में
मन्नासा के अनुसार अधिक मास में श्राद्ध, मासिक श्राद्ध, पितरों की क्रिया करना, तीर्थ, पुत्र संतान जन्म के बाद अन्ना प्रशन, नित्य पूजा, दान आदि कार्य किए जा सकते हैं।