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पांच हजार बीघा भूमि फंसी कमांड-अनकमांड के फेर में

3 वर्ष पहले
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साहवा इलाके की करीब 5000 बीघा भूमि का अभी तक ये तय नहीं हो पा रहा कि वो कमांड है या अनकमांड। इस संबंध में भ्रम फैला हुआ है और रोज शिकायतकर्ता मुख्य अभियंता आईजीएनपी के पास चक्कर काट रहे हैं।

मामला 1990 से जुड़ा है। तब एक सामान्य सर्वे में इस पांच हजार भूमि को कमांड इलाके में शामिल किया था। बाद में इसका माइक्राे सर्वे हुआ। माइक्रा सर्वे में वैपकॉस ने 5000 बीघा भूमि को 16.17 लाख हैक्टेयर सिंचित इलाके से बाहर कर दिया। उस वक्त कुछ जेईएन-एईएन स्तर के अभियंताओं के कागज लेकर किसान आईजीएनपी के पास पहुंच रहे कि उनका चक पहले कमांड था अब अनकमांड में है। मुख्य अभियंता ने एक तेज तरार्र अधिशासी अभियंता को इसमें जुटाया है।

खबर ये भी है कि अब इस 5000 बीघा भूमि को कमांड में नहीं लिया जाएगा क्योंकि ये इलाका 16.17 लाख हैक्टेयर क्षेत्र से ज्यादा है। दूसरी वजह कि नहर के पास अब पानी नहीं है जो इतनी भूमि को पानी दिया जा सके।

नहर अभियंता मानते हैं कि इसका चक प्लान नहीं बना और इसलिए ही ये समस्या खड़ी हो गई। चूंकि इस इलाके में उपनिवेशन विभाग नही हैं इसलिए ये काम रेवेन्यू को करने थे लेकिन रेवेन्यू ने हाथ खड़े कर दिए।

काम के शुरूआत में सर्वे व्यापक नहीं होता। वो रफ सर्वे था। उसके बाद वैपकॉस ने माइक्रो सर्वे किया और उसी सर्वे को अंतिम माना गया। उसमें जो कमांड है वो कमांड रहेगा। शेष को अब जगह नहीं मिल सकती। फिर भी जो शिकायतें आ रही हैं उनका परीक्षण कराया जा रहा है। अमरजीत मेहरड़ा, मुख्य अभियंता आईजीएनपी बीकानेर

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