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भगवान राम के जीवन से मिलता है मर्यादा का संदेश

3 वर्ष पहले
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परमात्मा सर्वव्यापक है। उनके अलौकिक रूप और लीलाओं के मर्म को समझकर मनुष्य अपने जीवन में सकारात्मक और श्रेष्ठ परिवर्तन कर सकते है। ये विचार थे सिहंस्थपीठाधीश्वर महंत क्षमाराम जी महाराज ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन और जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन मर्यादित और सकारात्मक सोच के साथ व्यतीत हुआ था।

उनके जीवन से जुड़े लोगों ने भी श्रीराम के आदर्श स्वरूप का अनुसरण किया था। श्री ब्राह्मण स्वर्णकार सत्संग समिति की ओर से खरनाड़ा मैदान में आयोजित श्रीराम कथा और मानस पाठ के आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने रामचरित मानस का सस्वर पाठ भी किया।

श्रीराम कथा और मानस पाठ का वचान करते महंत क्षमाराम जी महाराज।

भागवत में है जीवन का सार

बीकानेर. भागवत कथा में जीवन का सार विद्यमान है। जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए भागवत को आत्मसात करना जरुरी है। ये कहना था पं.मक्खनलाल शास्त्री का। पं.शास्त्री बुधवार को रसिक शिरोमणि मंदिर के रतन बिहारी पार्क में अधिकमास के मौके पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा का वाचन कर रहे थे। इस दौरान कथावाचक पं.शास्त्री ने परमात्मा की भक्ति में लीन होकर जीवन को सार मय बनाने का आह्वान भी किया। इस मौके पर देवस्थान विभाग की निरीक्षक श्वेता चौधरी और विजयशंकर व्यास ने भागवत आरती की। कथा में राजकुमार भाटिया, अनिल पाहुजा, संगीता व्यास, कोमल व्यास के साथ ही अनेक महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे।

हर पल करे प्रभु की आराधना

मनुष्य को परमात्मा की आराधना हर पल करनी चाहिए। ये कहना था पंडित रामकुमार जोशी का। बुधवार मघाराम कॉलोनी स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर में नानी बाई का मायरा कथा का वाचन किया। 18 मई तक कथा का आयोजन होगा।

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