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अखिल भारतीय राज्य प्रजा परिषद में बीकानेर का प्रतिनिधित्व

3 वर्ष पहले
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बीकानेर इतिहास दर्शन डॉ. शिव कुमार भनोत

इस बदलते हुए परिदृश्य को देख कर राज्यों के राष्ट्रवादी नेताओं ने सन् 1927 में ‘अखिल भारतीय राज्य प्रजा परिषद’ की स्थापना की। इस संस्था के गठन के पीछे यह उद्देश्य अंतर्निहित था कि भारतीय देशी राज्यों (रियासतों) के लोगों को वैसी ही राजनीतिक संस्थाओं का लाभ प्राप्त कराने का प्रय| किया जाना चाहिए जैसा अंग्रेजी प्रांतों (ब्रिटिश-प्रोविंसेज) के निवासियों को मिलता है।

दिसंबर, सन् 1927 में बंबई में इसका प्रथम अधिवेशन समायोजित किया गया। सन् 1927 के बाद देशी राज्यों में भी इसकी शाखाएं स्थापित की गई और इसकी राजस्थान शाखा का मंत्री उस समय जयनारायण को बनाया गया था। अखिल भारतीय राज्य प्रजा परिषद का मुख्य लक्ष्य राज्यों में शासकों के तत्वावधान में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था। इसने मौलिक अधिकारों और राज्यों की जनता के लिए एक स्वतंत्र न्यायालय की स्थापना की मांग भी उठाई। राजस्थान के विविध राज्यों से निम्नांकित महानुभावों को इसकी कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया था- नेनूराम (कोटा), शंकर लाल शर्मा (अजमेर), जयनारायण व्यास तथा कन्हैयालाल कलयंत्री (जोधपुर), रामदेव पोद्दार तथा बालकिशन पोद्दार (बीकानेर), त्रिलोकचंद माथुर (करौली)। विजय सिंह पथिक को इसका उपाध्यक्ष तथा रामनारायण चौधरी को राजस्थान एवं मध्य भारत के लिए प्रांतीय सचिव बनाया गया था। इस प्रकार राज्यों की समस्याओं को उठाने के लिए एक अखिल भारतीय मंच तैयार हो गया, जिसमें बीकानेर राज्य को भी प्रतिनिधित्व मिला। (लगातार)

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