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परमात्मा में भक्ति बढ़ाकर और आवश्यकताओं को कम कर हम सुखी रह सकते हैं

3 वर्ष पहले
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परमात्मा के प्रति निस्वार्थ भक्ति को बढ़ाकर तथा अपनी आवश्यकताओं को कम कर हम अपने जीवन को सुखी कर सकते है। प्रभु की आराधना हमारे मन के विकारों को दूर करने का सबसे बड़ा माध्यम होती है।

प्रत्येक मनुष्य भक्ति और आराधना के भावों को आत्मसात कर जीवन को ओजस्वी कर सकता है। ये कहना था सिहंस्थपीठाधीश्वर महंत क्षमाराम जी महाराज का। श्री ब्राह्मण स्वर्णकार सत्संग समिति की ओर से पुरानी जेल रोड स्थित खरनाड़ा मैदान में आयोजित श्रीराम कथा और मानस पाठ के छठे दिन शुक्रवार को क्षमाराम जी महाराज ने मर्यादा पुुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन आदर्शमयी और प्रेरक बताते हुए उनके जीवन को अंगीकार करने का आह्वान किया।

कथा का वाचन करते महंत क्षमाराम जी महाराज।

कथा में सजाई सचेतन झांकियां

भागवत कथा में जीवन का सार विद्यमान है। कथा का श्रवण और मनन जीवन को श्रेष्ठता प्रदान करता है। यह कहना था पं.मक्खन शास्त्री का। रतन बिहारी पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथा के दौरान कृष्ण और गोपिका की सचेतन झांकियां सजाई गई। इस मौके पर कथा का वाचन करते हुए पं.शास्त्री ने जड़ भरत के प्रसंग का वर्णन किया। मंदिर मुखिया विजयशंकर व्यास ने बताया कि इस मौके पर देवस्थान विभाग की निरीक्षक श्वेता चौधरी और सोनिया रंगा ने भागवत आरती की। कथा में संगीता व्यास, मोहित आचार्य, नवदीप व्यास, अनिता पुरोहित, राजकुमारी गुरेजा, राजकुमार भाटिया सहित अनेक श्रद्घालु मौजूद थे।

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