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साक्षरता चेतना व नवसाक्षरों के विकास के लिए साहित्य कृतियों की भूमिका अहम्

3 वर्ष पहले
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साक्षरता चेतना और नवसाक्षरों के सर्वांगीण विकास के लिए साहित्य कृतियों की भूमिका हर दौर में अहम और कारगर सिद्ध हुई है।

साक्षरता के लिए निरंतर प्रयास करने की दिशा में बीकानेर के साहित्यकारों द्वारा सृजित साहित्य कृतियों के माध्यम से साक्षरता के अभियान को मजबूती के साथ नई दिशा और दिशा हासिल हुई है। शुक्रवार को ये विचार उभर कर आए साहित्यकार राजेंद्र जोशी की कृति मजदूरी की पोटली पुस्तक के लोकार्पण समारोह में। बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास एनबीटी के संयोजन में प्रकाशित इस पुस्तक का लोकार्पण समारोह डॉ.श्रीलाल मोहता और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक श्यामसिंह राजपुरोहित के आतिथ्य में किया गया। प्रौढ़ शिक्षण समिति सभागार में आयोजित समारोह के दौरान अतिथि श्याम सिंह राजपुरोहित ने विचार व्यक्त करते हुए लोकार्पित कृति को निरक्षरता उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। वहीं इस मौके पर बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति के अध्यक्ष डॉ.श्रीलाल मोहता ने कहा कि नवसाक्षरों के मानस को ध्यान में रखते हुए सहज-सरल भाषा में कृति की रचना करना जटिल कार्य होता है। ये कृति साक्षरता के प्रयासों को बल प्रदान करेगी। लोकार्पण समारोह के दौरान कृति के लेखक राजेंद्र जोशी ने कृति की रचना प्रक्रिया को साझा करते हुए बताया कि नवसाक्षरों की मानसिकता को ध्यान में रखते हुए इस कृति की रचना की गई है। समारोह के प्रारंभ में समिति सचिव डॉ.ओम कुवेरा ने स्वागत किया वहीं समापन पर जन शिक्षण संस्थान के उपाध्यक्ष अविनाश भार्गव ने आभार जताया।

मजदूरी की पोटली का लोकार्पण करते अतिथि।

नवसाक्षर लेखन कार्यशाला के दौरान हुई थी कृति की रचना

नवसाक्षरों के लिए उपयोगी कृति मजदूरी की पोटली की रचना राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह के तहत 15-16 नवंबर 2014 को समिति सभागार में आयोजित नवसाक्षर साहित्यमाला लेखन कार्यशाला के दौरान राजेंद्र जोशी द्वारा की गई थी। कार्यशाला में बीकानेर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से आए 17 वरिष्ठ और युवा साहित्यकारों, पत्रकारों, शिक्षकों ने नवसाक्षरों के लिए रचनाएं सृजित की थी। कार्यशाला के दौरान लिखी कृति मजदूरी की पोटली का प्रकाशन बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति और एनबीटी द्वारा किया गया है।

ये रहे मौजूद

लोकार्पण समारोह में कमल रंगा, बुलाकी शर्मा, हीरालाल हर्ष, किशन कुमार आजाद, मुकेश व्यास, हरीश बी.शर्मा, चंद्रशेखर श्रीमाली, राजाराम स्वर्णकार, प्रमोद कुमार चमोली, नगेंद्र किराडू, विजय खत्री, डॉ.रेणुका व्यास, भवानी सोलंकी, सुभाष जोशी, मांगीलाल भद्रवाल और विष्णु शर्मा आदि मौजूद थे।

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