ऑल इंडिया स्टेट्स पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एन.सी.केलकर का यह मानना था कि कांग्रेस को अपने कार्यक्रम में, राज्यों में उत्तरदायी शासन की स्थापना का मुद्दा विधिवत्त सम्मिलित कर लेना चाहिए। वे इस बात के पक्षधर थे तथा ऐतद्विषयक चर्चा को आगे बढ़ाते रहते थे। इसी सोच के चलते उन्होंने सन् 1933 में ऑल इंडिया स्टेट्स पीपुल्स काॅन्फ्रेंस के मंच से यह आशा व्यक्त की कि कांग्रेस राज्यों में उत्तरदायी शासन की स्थापना को अपने कार्यक्रम में सम्मिलित कर ले किन्तु, कांग्रेस ने इसे स्वीकार नहीं किया।
उल्लेखनीय है कि, कांग्रेस ने अपनी प्रांतीय समितियों को विभिन्न भारतीय राज्यों में संघर्ष करने नहीं दिया क्योंकि इससे कांग्रेस की समस्त शक्ति विभिन्न राज्यों के शासकों से उलझने में लग जाती और कांग्रेस तथा देशी रियासतों के नरेशों के मध्य पारस्परिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती, जिसे कांग्रेस ठीक नहीं मानती थी। सन् 1937 से 1939 के बीच के दौर में राज्यों के शासक वर्ग ने अपने सम्मान तथा प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए भारतीय संघ में शामिल होने से इनकार कर दिया तथा केन्द्र में उत्तरदायी शासन की स्थापना की संभावना काे समाप्त कर दिया। सन् 1937 में निर्वाचनों के फलस्वरूप ग्यारह में से आठ अंग्रेजी प्रांताें में कांग्रेस की सरकारें बन गईं, इससे प्रांतीय स्वायतता का व्यावहारिक रूप सबके सामने आ गया।(लगातार)