सारा जगत महाकाव्य है। समाज और मनुष्य को सुसंस्कृत करने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस आपाधापी वाले समय में लेखक की कलम से ऐसा सृजन हो जिससे संस्कृति को नष्ट होने से बचाया जा सके केे साथ ही साहित्य के सामर्थ्य और उसके विभिन्न आयामों पर शनिवार को प्रदेश भर से आए साहित्यकारों ने अपने विचार साझा किए। मौका था अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रांतीय महाधिवेशन और वार्षिक साहित्यकार सम्मेलन का।
वेटरनरी विश्वविद्यालय सभागार में समारोह का उद्घाटन स्वामी संवित् सोमगिरी जी महाराज, परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्रीधर पराड़कर, राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर के अध्यक्ष डॉ.इंदुशेखर तत्पुरुष, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बी.आर.छींपा, राजूवास के अधिष्ठाता प्रो.त्रिभुवन शर्मा, क्षेत्रीय संगठन मंत्री विपिनचंद्र, डॉ.मथुरेश नंदन कुलश्रेष्ठ,भाजपा शहर जिलाध्यक्ष डॉ.सत्यप्रकाश आचार्य और महापौर नारायण चौपड़ा के आतिथ्य में किया गया। इस दौरान अतिथियों ने शब्द के सामर्थ्य को पहचान कर समाज को सकारात्मक दिशा देने के लिए साहित्यकारों का आह्वान किया। इस मौके पर प्रदेशाध्यक्ष डॉ.अन्नाराम शर्मा ने स्वागत किया। समारोह के दौरान साहित्य का सामर्थ्य और हमारा अधिष्ठान, साहित्य का सामर्थ्य और राष्ट्र बोध तथा वर्तमान सामाजिक सांस्कृतिक चुनौतियां और युवा लेखन विषय पर तीन सत्रों का आयोजन किया गया। सत्रों में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों ने विचार रखे।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित अधिवेशन में बोलते श्रीधर पराड़कर।
रा.साहित्य अकादमी अध्यक्ष इंदुशेखर का स्वागत
राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर अध्यक्ष के रूप में पहली बार बीकानेर आए अकादमी अध्यक्ष डॉ.इंदुशेखर तत्पुरुष का सम्मान शनिवार को बीकानेर ब्राह्मण समाज की ओर से किया गया। समाज के संभागीय संयोजक के.के.शर्मा ने बताया कि सम्मान समारोह में राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष श्याम महर्षि, डॉ.बी.एल.भादाणी, गोवर्धन चौमाल, भाजपा महिला मोर्चा जिला देहात प्रभारी शोभा सारस्वत, सविता गौड़, भैरूरतन जस्सू और दिनेश शर्मा ने दुपट्टा पहनाकर तथा भगवान परशुराम की प्रतिमा प्रदान कर सम्मान किया। इस मौके पर गोविंद पारीक, साहित्यकार रवि पुरोहित, गजानंद सारस्वत, भागीरथ कौशिक और धनंजय सारस्वत आदि मौजूद थे।