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जांच मेंं बाधा बने पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों को बुलवाने अब डायरेक्टर से मार्गदर्शन मांगा

3 वर्ष पहले
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गौरवपथ निर्माण में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले की जांच 18 महीने से आगे नहीं बढ़ पा रही है, कारण इंजीनियरों के बीच आपसी सांठगांठ हो गई है। दैनिक भास्कर ने 13 अप्रैल के अंक में ठप पड़ी जांच प्रक्रिया के बारे में खबर छापी तो जांच अधिकारी ने आरोपी 8 इंजीनियरों सहित गवाह बने पीडब्ल्यूडी के सेंट्रल लैब रायपुर के आफिस इंचार्ज एवं सब इंजीनियर को 25 अप्रैल को उपस्थित होने नोटिस भेज दिया। 11 करोड़ की लागत वाले गौरवपथ के निर्माण में करोडो़ं के घोटाले की जांच में लगातार हो रही देरी से चल रही प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गए हैं। जांच अधिकारी एवं संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन कार्यालय में पदस्थ अधीक्षण अभियंता पीएन साहू अब कह रहे हैं कि जांच को आगे बढ़ाने डायरेक्टर नगरीय प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा गया है। साफ है कि जब तक पीडब्ल्यूडी के अफसर गवाही देने नहीं आएंगे, जांच ठप पड़ी रहेगी और नोटिस की औपचारिकता चलती रहेगी।

इन अफसरों के कार्यकाल में हुई अनियमितता: मंगला चौक से महाराणा प्रताप चौक तक सीसी सड़क, डिवाइडर निर्माण डब्ल्यूबीएम रोड चौड़ीकरण और ट्रैफिक सिग्नल बोर्ड के कार्य के लिए जिन अधिकारियों के कार्यकाल में कार्य हुआ उनमें ये अधिकारी शामिल रहे। एमए हनीफी आयुक्त 23 जून 2005 से 23 मार्च 2009 तक, ओपी तिवारी कार्यपालन अभियंता 24 मार्च 2009 से 5 जून 2009 तक, मोहनपुरी गोस्वामी सहायक अभियंता 23 मई 2008 से 4 जून 2009 तक और राजकुमार साहू उप अभियंता 23 मई 2008 से 8 दिसंबर 2009 तक रहे।

20 में से 15 अफसर अनियमितता और गड़बड़ियों की वजह से सस्पेंड हो चुके हैं

आईएएस अफसरों को भनक नहीं

तकनीकी अधिकारी के रूप में हनीफी अकेले प्रभारी कमिश्नर रहे, जो कार्यपालन अभियंता रहे। निर्माण संबंधी सारी बारीकियों को तकनीकी अधिकारी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। इनके बाद जितने भी कमिश्नर चाहे वह आईएएस ही क्यों न हो गैर तकनीकी रहे। लिहाजा उन्हें गौरवपथ के गड़बड़ घोटाले की भनक नहीं लग सकी। सारे निर्माण का दारोमदार इंजीनियरों की फौज पर रहा। सीवरेज शाखा में पदस्थ अधिकारियों की फेहरिस्त में आयुक्त मुकेश बंसल जून 2009 से जनवरी 2011 तक, सौम्या चौरसिया जनवरी 2011 से मार्च 2011 तक, यशवंत कुमार अप्रैल 2011 से जुलाई 2012 तक और अवनीश कुमार शरण जुलाई 2012 से फरवरी 2014 तक रहे। इस दौरान कार्यपालन अभियंता पीके पंचायती अक्टूबर 2008 से, सहायक अभियंता एमपी गोस्वामी अक्टूबर 2008 से जुलाई 2009 तक, सुरेश शर्मा जुलाई 2009 से अगस्त 2015 तक, उप अभियंता सुरेश बरुआ अक्टूबर 2008 से जुलाई 2009 तक और ललित त्रिवेदी अगस्त 2011 से पदस्थ रहे।

इनके कार्यकाल में ठेकेदारों को हुआ भुगतान

प्रथम चरण: निर्माण ठेकेदार मेसर्स अग्रवाल इंफ्रा बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड ने किया। इनका काम मंगला चौक से महाराणा प्रताप चौक तक सीमेंट की सड़क, डिवाइडर निर्माण, डब्ल्यूबीएम रोड चौड़ीकरण और ट्रैफिक सिग्नल बोर्ड का था। इस दौरान आयुक्त एमए हनीफी 23 जून 2005 से 23 मार्च 2009 तक रहे। इसका पहला भुगतान उन्होंने 21 जनवरी 2009 को 1103790 रुपए का किया। इसके बाद ओपी तिवारी आयुक्त बने जो कार्यपालन अभियंता थे(अब स्वर्गीय) वे 24 मार्च 2009 से 5 जून 2009 तक पदस्थ रहे। दूसरा भुगतान 6 जून 2009 को 6473291 रुपए का किया गया। इसके बाद आयुक्त मुकेश बंसल हुए वे 8 जून 2009 से 29 जनवरी 2011 तक रहे, उन्होंने तीसरा भुगतान 4 दिसंबर 2009 को 140742 रुपए और चौथा भुगतान 14 जनवरी 2010 को 3884964 रुपए का किया। इस समय लेखाधिकारी अविनाश बापते, गोपाल सिंह ठाकुर और राजकुमार द्विवेदी थे। वहीं सहायक अभियंता युजिन तिर्की, मोहनपुरी गोस्वामी और सुरेश शर्मा थे। उप अभियंता राजकुमार साहू थे। इन्होंने 12868787 रुपए का भुगतान किया।

गौरवपथ में कई बार निर्माण के बाद भी बने हुए है गड्‌ढे।

द्वितीय चरण: निर्माण ठेकेदार मेसर्स सांई कंस्ट्रक्शन ने किया। इनका काम स्वर्ण जयंती नगर से महाराणा प्रताप चौक तक सीमेंट की सड़क का निर्माण करना था। इस दौरान आयुक्त अवनीश शरण थे। वे 30 जुलाई 2012 से 1 फरवरी 2014 तक पदस्थ रहे। वे 8 अगस्त 2012 को प्रथम भुगतान 3550215, द्वितीय भुगतान 24 सितंबर 2012 को 2141914 रुपए, तृतीय भुगतान 7 नवंबर 2012 को 3771651 रुपए और चतुर्थ भुगतान 2110945 रुपए का किया। इस दौरान अधीक्षण अभियंता ओपी तिवारी, लेखाधिकारी अविनाश बापते, प्रभारी सहायक अभियंता गोपाल सिंह ठाकुर, उप अभियंता श्याम मनोहर उज्जैनी थे। इन्होंने 11574725 रुपए का भुगतान किए।

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