जनजातीय औषधि पौधों पर अनुसंधान के लिए सीयू को मिले 52.60 लाख रुपए
सेंट्रल यूनिवर्सिटी के फार्मेसी विभाग का चयन विशेष सहायता कार्यक्रम सैप के दूसरे चरण के लिए किया गया है। इसके तहत जनजातीय औषधि पौधों पर अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से 52.60 लाख रुपए अनुदान मिलेगा। इसी तरह साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड ने विभाग के सहायक प्राध्यापक डाॅ. पार्था प्रतीम राॅय के प्रस्ताव पर 32 लाख रुपए की शोध परियोजना स्वीकृत की है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विशेष सहायता कार्यक्रम के दूसरे चरण के लिए प्रोफेसर विनोद डी. रंगारी, अधिष्ठाता फार्मेसी विभाग को समन्वयक और डाॅ. दिलीप कुमार पाल, सह प्राध्यापक फार्मेसी विभाग को उप-समन्वयक नियुक्त किया है। प्रोफेसर रंगारी ने बताया कि पिछले साल उन्होंने विशेष सहायता कार्यक्रम (सैप) के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के समक्ष प्रस्तुतिकरण दिया था। इसके पहले सीयू फार्मेसी विभाग में विशेष सहायता कार्यक्रम (सैप) का प्रथम चरण संचालित था, जो पूर्ण हो चुका है। दूसरे चरण के विशेष सहायता कार्यक्रम के लिए कुल 52.60 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस कार्यक्रम की अवधि 5 वर्ष है। विशेष सहायता कार्यक्रम के दूसरे चरण में उपकरण के लिए 23 लाख, भवन, प्रयोगशाला आदि के उन्नयन के लिए 5 लाख व आवर्ती व्यय के लिए 24 लाख 50 हजार रुपए स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम में शोध एवं अनुसंधान के लिए एक शोध छात्र की नियुक्ति की जाएगी। प्रो. रंगारी के अनुसार इस कार्यक्रम में जनजातीय औषधि पौधों का अध्ययन किया जाएगा और इन पौधों से नई औषधि बनाने के लिए शोध किया जाएगा। इसी तरह फार्मेसी विभाग के सहायक प्राध्यापक डाॅ. पार्था प्रतीम राॅय को 32 लाख रुपए की शोध परियोजना, साइंस एंड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार ने प्रदान की है। शोध परियोजना का विषय है- कम्प्यूटेशनल इकोटाॅक्सीकोलाजिकल माडलिंग एण्ड रिस्क असेसमेंट आॅफ सलेक्टेड क्लासेस आॅफ पेस्टीसाइड्स यूजिंग केमेामेट्रिक टूल्स। इस परियोजना के लिए 32 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
सीयू के फार्मेसी विभाग का सैप के दूसरे के लिए हुआ चयन