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गलत विवेचना, एफआईआर में देरी, गवाहों के मुकरने पर कोर्ट से छूट जा रहे अपराधी

3 वर्ष पहले
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पुलिस की गलत विवेचना, एफआईआर में देरी व गवाहों का मुकरना अपराधियों की कोर्ट से छूटने की प्रमुख वजह बन रही है। इस कारण 3 साल में रेंज से 761 प्रकरणों के आरोपी बरी हो गए। दोषमुक्ति के समीक्षा के दौरान कमेटी ने ऐसे कारणों के 132 केस पाए जिनमें पुलिस की लापरवाही सामने आई।

पिछले तीन साल में रेंज के बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर चांपा व मुंगेली जिले में हुए गंभीर अपराधों के 132 मामलों में पुलिस की गलत विवेचना सामने आई है। इस वजह से पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिला। पकड़े गए लोगों को लाभ मिला और सजा नहीं मिल पाई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी दोषमुक्ति समीक्षा कमेटी ऐसे मामलों की समीक्षा कर रही है। कमेटी 2016-2017,2018 के रेंजभर के दोषमुक्ति के ऐसे 761 प्रकरण सामने आए हैं। इनमें पुलिस की विवेचना सहित अन्य खामियां सामने आई हैं। पीड़ित को इससे न्याय नहीं मिल पाया। ऐसे विवेचकों जिनके कारण पुलिस की छवि खराब हुई है, कमेटी ने कार्रवाई की है। गलत जांच के कारण कोर्ट से अपराधियों के दोषमुक्त होने के मामले में 3 साल के भीतर 19 विवेचकों के खिलाफ दोषमुक्ति की कमेटी ने कार्रवाई की। इनमें 12 रायगढ़ के, कोरबा के 5, जांजगीर चांपा के 2 विवेचक शामिल हैं। बिलासपुर व मुंगेली में एक भी कार्रवाई नहीं हुई है।

132 केसों में पुलिस की लापरवाही सामने आई

ऐसे छूट गए आरोपी

दुष्कर्म पीड़िता की उम्र से संबंधित जब्त नहीं किए

25 फरवरी 2015 की रात बिल्हा क्षेत्र की 17 वर्षीय किशोरी को दीनदयाल गोड़ 21 वर्ष अपहरण कर ले गया था। किशोरी के पिता की रिपोर्ट पर पुलिस ने जुर्म दर्ज किया था। विवेचना में आरोपी के दुष्कर्म करने संबंधी साक्ष्य पाए जाने से धारा 363,376 भादवि व पाॅक्सो एक्ट जोड़कर 5 मार्च 2015 को आरोपी को गिरफ्तार किया था। 24 मार्च 2013 को कोर्ट में चालान पेश किया गया। इस केस में पुलिस ने विवेचना में हाईकोर्ट के निर्देश का पालन नहीं किया। उसने किशोरी के उम्र के संबंध में दस्तावेजों की जब्ती नहीं की। इस कारण आरोपी कोर्ट 16 अक्टूबर 2015 को छूट गया। इस केस में ईजी ने बिल्हा के तत्कालीन थाना प्रभारी दिलीप चंद्राकर के खिलाफ कार्रवाई की है।

गवाहों के कारण अपहरण का आरोपी दोषमुक्त

16 दिसंबर 2014 को रायगढ़ जिले की 14 वर्षीय किशोरी घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी पर शाम तक घर लौटकर नहीं आई। परिजनों ने तलाश की पर नहीं मिली। उसकी मां की रिपोर्ट पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया था। 24 दिसंबर 2014 को किशोरी को आरोपी सिद्देश्वर कुमार 22 वर्ष के कब्जे से बरामद कर उसके खिलाफ धारा 363,366,376 व 4 पाॅक्सो एक्ट के तहत जुर्म दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर रिमांड पर जेल भेज दिया था। 27 जनवरी 2015 को इस केस का कोर्ट में चालान पेश हुआ। ट्रायल के दौरान पुलिस ने जो गवाह बनाए थे उन्होंने अभियोजन का समर्थन नहीं किया आैर आरोपी दोषमुक्त हो गए। केस की जांच थाना बुरला के तत्कालीन थाना प्रभारी केएल नंद ने की थी।

कमेटी की जांच में दोषमुक्ति के ये प्रमुख कारण आए हैं सामने

हाईकोर्ट के उम्र के संबंध में जारी किए गए दिशा निर्देश का पालन नहीं किया जाना।

गवाहों के अभियोजन का समर्थन नहीं करना।

केस में राजीनामा होना।

विवेचकों के चक्षुदर्शी एवं स्वतंत्र साक्षी का कथन अभिलेख नहीं करना।

आरोपी व जब्त सामानों का पहचान कार्रवाई साक्ष्य अधिनियम की धारा 9 के तहत नहीं करने से।

नुकसान के संबंध में नुकसानी पंचनामा तैयार नहीं करने से।

बेड हेड टिकट जब्त नहीं करने से पीड़ित को आई चोटों की गंभीरता सिद्ध नहीं हो सकने से।

प्रथम सूचना रिपोर्ट देर से कायम करने से।

वास्तविक कब्जाधारी और स्वामित्व के संबंध में कोई दस्तावेजी अथवा मौखिक साक्ष्य संकलन नहीं करने से।

नारकोटिक एक्ट के प्रकरण में अधिनियम की धरा 50 के प्रावधानों का पालन नहीं करने से।

हस्तलिपि व अन्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट कोर्ट में समय पर पेश नहीं करने के कारण।

गवाहों का सही पता अंकित नहीं होने पर समंस वारंट अदम तामील रहने से।

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