झीरम मामले की जांच कर रहे जस्टिस प्रशांत मिश्रा की एकल सदस्यीय न्यायिक आयोग ने लिब्रहान व नानावटी आयोग के समक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के कथनों की कॉपी प्रस्तुत करने को लेकर दिए गए आदेश की कॉपी प्रस्तुत करने समय देते हुए 25 जून को अगली सुनवाई तय की है। इस दौरान कांग्रेस और राज्य शासन को संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने के प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस ने सुनवाई कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, तत्कालीन गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री ननकीराम कंवर को शपथ पत्र के साथ गवाह के रूप में प्रतिपरीक्षण के लिए बुलाने की मांग करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के साथ नानावटी और लिब्रहान आयोग का हवाला दिया था, जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री, गवर्नर, केंद्रीय मंत्री व अन्य गवाही के लिए बुलाए गए थे। सोमवार को कांग्रेस की तरफ से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि कांग्रेस सांसद छाया वर्मा के जरिए गृह मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर लिब्रहान और नानावटी आयोग के समक्ष तत्कालीन प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और गृह राज्य मंत्री के कथनों की सत्य प्रतिलिपि की मांग की गई थी। नानावटी आयोग के संबंध में केंद्र सरकार के अवर सचिव ने छत्तीसगढ़ सरकार से इस पर कमेंट मांगा है। वहीं, दूसरे पत्र में लिब्रहान आयोग में दर्ज कथन उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है। श्रीवास्तव ने आयोग को बताया कि मौखिक चर्चा के दौरान गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध होने की जानकारी दी थी, लेकिन आवेदन प्रस्तुत करने के बाद गृह मंत्रालय के इंटर स्टेट डिवीजन में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दे दी गई।
आयोग ने कहा- दस्तावेज प्राप्त करने दोनों पक्ष करें प्रयास
आयोग ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान दिए गए आदेश के मद्देनजर यह उचित लगता है कि संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने कुछ समय इंतजार किया जा सकता है। आयोग ने इस अवधि में दोनों पक्षों को संबंधित दस्तावेज प्राप्त करने के लिए प्रयास करने का निर्देश देते हुए 25 जून को अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।