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तनाव को सकारात्मक रूप में लें, ऐसा नहीं करें की माता-पिता दुखी हो जाएं: डॉ. नंदा

3 वर्ष पहले
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बिलासपुर | विश्व स्वास्थ्य संगठन के रिकार्ड के अनुसार हर वर्ष 8 लाख लोग आत्महत्या करते हैं। इसमें से 23 प्रतिशत लोग भारत के हैं। 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के लोग सबसे ज्यादा आत्महत्या कर रहे हैं। जीवन को छोटी समस्या आने पर नष्ट करना उचित नहीं। तनाव का प्रबंधन करते हुए तनाव को सकारात्मक रूप में लें, तभी हम अपने परिवार व समाज के लिए योेगदान दे सकते हैं। उक्त बातें सीयू में प्रशिक्षण के दौरान डाॅ. बीआर नंदा ने कही। प्रो. मिश्रा ने युवाओं में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राएं भावावेश में आकर ऐसा कोई निर्णय न लें, जिससे उनके माता-पिता व समाज को दुःख पहुंचे। डाॅ. होतचंदानी ने कहा कि हर समस्या का समाधान उसी समस्या से होकर निकलता है। किसी समस्या का हल हमें उस समस्या में ढूंढना होगा। लेकिन इसमें धैर्य की जरूरत पड़ती है। कोई भी काम फटाफट नहीं होता। 60 छात्रों को प्रशिक्षण दिया गया।

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