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जैकेट व फ्रंट पेज के शेष

3 वर्ष पहले
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राजनाथ सीएम हाउस में लेंगे नक्सल मुद्दे पर बैठक: दंतेवाड़ा में हुए बड़े नक्सली हमले की रिपोर्ट लेने के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह नक्सल मुद्दे पर सोमवार को बड़ी बैठक लेंगे। दोपहर 12 बजे से ये बैठक सीएम हाउस में होगी।

सरकार बन गई है पर...

मैं मिलूं, श्रीमती जी या बिटिया, वे पिताजी-माताजी के पास दांत घिसें या मेरे माली-ख़ानसामा-मैनेजर-गार्ड की कुंडली खंगालें, घर पर मौजूद कोई भी प्राणी हाजी भाई से कम-अज़-कम आधा-एक घंटा तो प्रवचन-पीड़ित होता ही है। आज सुबह आ धमके और लगे बड़बड़ाने, ‘ससुर कर्नाटक का नाटक, चुनाव बाद भी उतना ही रंगीन है, जितना पहले भाग में था, अब देखना, ये नौटंकी उन्नीस के लोकसभा आते-आते पूरे अठारह पर्वों के महाभारत में न बदल जाए तो कहना! और एक तुम हो महाकवि (मुझे लज्जित करने के लिए उनके पास मेरे लिए ‘व्याज-स्तुति’ के जो सम्बोधन हैं, उनमें महाकवि भी एक अचूक तीर है), न दक्खन देख रहे हो न दक्खिन-पंथ!

अमां लानत है इतनी भी ईमानदारी और सत्यवादिता की लत पर!’ उनकी लानत से आदतन अप्रभावित होते हुए मैंने कहा, ‘अब किसी भी दल को बहुमत न मिला तो इसमें गवर्नर साहब क्या करते हाजी भाई? आप भी खामखां ‘लोकतंत्र खतरे में है’ वाले फ़ोबिया से ग्रस्त हो!’ बोले, ‘बात तो तुम्हरी भी ठीक है यार, कर्नाटक में सत्ता की छोकरी अनैतिक निकल गयी तो लगे भाजपाई सीटी मारने और कांग्रेस क्या खा कर पत्थर मारती, जो खुद साठ साल में सौ बार लोकतंत्र और उसकी नैतिकता को चौराहे पर बिठा चुकी है! और तुम्हारे वालों की हनक-हिम्मत-औकात को इसी कांग्रेस का सौ करोड़ी अजगर खा ही गया!’ मैंने कहा, ‘अब तो बहुमत-परीक्षण भी हो गया, सुबह-सुबह काहे ज़माने भर को गरिया रहे हो?’ वे बोले, ‘बहुमत की तो पूछोई मत, बेचारे राहुल को बहू तो मिल नहीं रही, बहुमत भी जैसे-तैसे जुगाड़ से मिलता है, और दूसरा न बहू की सुनता न बहुमत की! खैर, हमें क्या? चलते हैं, ज़रा हम भी अपनी दुकान सजा लें, कर्नाटक में तो ससुर बड़े-बड़े शाहों ने खोल ही ली। तब तुम शेर सुनो महाकवि -

‘वोटर ये सोचता है कि एमएलए जो चुना, उनका कबाड़ है या वो इनका कबाड़ है?

उन्नीस के नाटक का रिहर्सल है कर्नाटक, सरकार बन गई है पर जारी जुगाड़ है!’

मैंने राहत की सांस ली, आप भी लीजिए!

पेट्रोल एक दिन...

अब यह 7.8% बढ़कर 84.97 डॉलर हो गया है। सरकार एक्साइज घटाने से पहले ही इनकार कर चुकी है। देश में सबसे महंगा पेट्रोल महाराष्ट्र में और डीजल आंध्र में :

पेट्रोल: 85.77 रुपए प्रति लीटर महाराष्ट्र के परभणी में था रविवार को।

सबसे सस्ता: पणजी में 70.26 रुपए लीटर।

डीजल: 73.45 रुपए प्रति लीटर आंध्रप्रदेश के हैदराबाद में था रविवार को।

सबसे सस्ता: पोर्ट ब्लेयर में 63.35 रु. लीटर।

एसईसीएल की 78...

समय-समय पर तकनीकी कारणों से कुछ खदानों से कोयला निकालने का काम बंद कर दिया जाता है, लेकिन करीब 75-80 खदानों से वर्षभर कोयला निकालने का काम चलता रहता है। आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2017-18 में एसईसीएल ने 144.70 मिलियन कोयले का उत्पादन किया। पिछले स्टाक को मिलाकर कुल 151.11 मिलियन टन कोयला डिस्पेच किया गया, यानी लिंकेज के माध्यम से उद्योगों को बेचा गया। एसईसीएल कोयला बेचने के लिए ऑनलाइन टेंडर जारी करता है। कोयला खरीदने वाली कंपनियों, उद्योगों को कोयला एसईसीएल की संबंधित खदान की साइडिंग से उठाना पड़ता है। खरीदी करने वाली कंपनियाें, उद्योगों के प्रतिनिधि भी यहां मौजूद रहते हैं। उनकी मौजूदगी में कोयले की सैंपलिंग यानी जांच होती है। साइडिंग से ट्रेनों की रैकों या हाइवा-ट्रकों के जरिए कोयला संबंधित जगहों के लिए रवाना कर दिया जाता है, लेकिन यहां सिस्टम की कमजोरी का फायदा कोयले की कालाबाजारी करने वाले उठाते हैं। एसईसीएल की सीमा से बाहर निकलते ही बड़े पैमाने पर चोरी का खेल शुरू होता है। चोरी की गई कोयले को अवैध कोल डिपो में डंप कर रखा जाता है। एसईसीएल की हर खदान के पास ऐसे कई अवैध कोल डिपो चल रहे हैं, जहां हर समय कई टन कोयला उपलब्ध रहता है। छोटे उद्योगों, ईंट भट्ठों सहित ईंधन के सहारे संचालित किए जा रहे कारोबार में चोरी के कोयले का उपयोग किया जाता है।

ऐसे चलता है डिपो में खेल : एसईसीएल की खदानों से उद्योगों को कोयला लिंकेज पर मिलता है। उद्योगपतियों के पास रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती इसलिए वह इन्हें डंप कर रखते हैं। कुछ उद्योगपति कोल डंप के लिए वह खनिज विभाग से अपने नाम पर लाइसेंस लेते हैं और अपने परिचित को यह काम सौंप देते हैं। परिचित इसका फायदा उठाता है। वह लिंकेज का कोयला डंप करने के नाम से डिपो में कोयले का अवैध कारोबार शुरू कर देता है। डिपो से वह जरूरत के हिसाब से उद्योग को कोयला तो भेजता है, पर यह मिलावटी होता है। उद्योगों के नाम से खदान से अच्छे ग्रेड का कोयला सप्लाई होता है। इनकी कीमत करीब 6 हजार रुपए टन होती है। वहीं चूरा व पत्थर की मिलावट वाला कोयला आधी कीमत पर मिलता है। डिपो संचालक दोनों तरह का माल रखता है। कोयला उद्योग में भेजते समय वह एक नंबर के कोयले में दो नंबर का कोयला मिला देता है। ट्रक चालक भी इसका फायदा उठाते हैं। वे उद्योगपतियों का एक नंबर का कोयला ऐसे डंपिंग डिपो में 5 रुपए किलो के हिसाब से बेच देते हैं। डिपो संचालक कोयले की जगह उसकी गाड़ी में काला पत्थर या डस्ट मिला देता है। कोयले के अवैध कारोबारियों को पकड़ने का काम पुलिस व खनिज विभाग का होता है, लेकिन कारोबारी दोनों को मिला लेता है।

3. पुलिस: डिपो सील...

बिलासपुर की बात करें तो पुलिस ने रतनपुर व हिर्री क्षेत्र के 12 कोल डिपो को छापा मारकर सील कर दिया था। अफसरों ने संबंधित थानेदारों को चेतावनी दी थी कि उनके क्षेत्र में यह कारोबार फिर से शुरू हुआ तो वे जिम्मेदार होंगे। दो माह बाद अचानक सभी डिपो एक-एक कर खुलते गए। यहां पहले की तरह फिर से अवैध कोयले का कारोबार शुरू हो गया है।

सारे डिपो बंद करने की लिखी थी चिट्ठी: एसपी : एसपी आरिफ शेख का कहना है कि हमने सभी डिपो को बंद करने की माइनिंग को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद फिर से खुल जाना समझ से परे है। जांच करने कलेक्टर ने पुलिस व खनिज विभाग की ज्वाइंट टीम बनाई है। अब जहां भी कोयले की कालाबाजारी की सूचना मिलेगी खनिज विभाग को साथ लेकर कार्रवाई की जाएगी।

रायपुर की इस...

कई नामी डाक्टर यहां रेगुलर: राजधानी समेत प्रदेश के कई जाने-माने डॉक्टर यहां अपनी सेवा दे रहे हैं। यहां नियमित आने वाले डाक्टरों में डॉ. अनिल खाखरिया, डॉ. विप्लव दत्ता, डॉ. प्रीति सक्सेना, डॉ. निधि ग्वालरे, डॉ. अखिलेश दुबे, डॉ. शिल्पा दुबे, डॉ. सिद्धार्थ ठाकुर, डॉ. आशा पांडेय, डॉ. दिलीप लालवानी, डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना, डा. एसएस वर्मा, डा. सुरेंद्र शुक्ला, डॉ. अरजीत सूर, डॉ. रितेश साहू, डॉ. रोहित दिलवारी, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. रमन श्रीवास्तव, डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, डॉ. मनीष राठौर, डॉ. नितिन प्रसाद शर्मा, डॉ. रुचि दुबे, डॉ. मेघा भागवत, डॉ. धर्मेंद्र भीसाली, डॉ. अंजना मोदी, डॉ. पीए कमाल, डॉ. केके भोई, डॉ. जयवर्धन, डॉ. विष्णु गुप्ता, डॉ. सै. इरफान हुसैन, डॉ. जयश्री दबे, डॉ. गोपाल जनस्वामी, डॉ. के एम कांबले, डॉ. सीके दुबे, डॉ. जीएस देवांगन और डॉ. जयश्री दवे यहां नियमित हैं। फीजियोथैरेपी के लिए डॉ. तोमेश देवांगन, डॉ. मंजरी दुबे और डॉ. प्रेरणा तिवारी भी हैं।

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