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सड़क में लापरवाही, राजसात किए 60 लाख रुपए, फिर उसी फर्म को भुगतान

3 वर्ष पहले
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लोक निर्माण में डिवीजन-1 के अफसरों द्वारा फर्म और उसके ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का नया मामला सामने आया है। इस बार ये प्रकरण साई कंस्ट्रक्शन से जुड़ा हुआ है। छह साल पहले सीपत से बेलतरा मार्ग बनने के दौरान इनके खिलाफ रोड निर्माण में लापरवाही की शिकायत हुई। तब अफसरों ने इनकी परफॉमेंस गारंटी के तौर पर जमा पैसों से 60 लाख रुपए राजसात कर लिए। जब पुराने अधिकारी चले गए तक नए अधिकारियों ने आते ही उसी फर्म को ये पैसे फिर से वापस कर दिए। इसके चलते पीडब्ल्यूडी में अधिकारियेां की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। अधिकारी और ठेकेदार दोनों ही कह रहे हैं कि ये जानकारी गलत है। जबकि भास्कर के पास इसके दस्तावेज मौजूद हैं।

वर्ष 2014 में सीपत-बेलतरा के उन्नयन और चौड़ीकरण का काम किया गया था। काम समय पर शुरू नहीं करने के कारण उस वक्त के एक्जीक्यूटिव इंजीनयर वीएस कोरम ने संबंधित फर्म की परफार्मेंस गारंटी की 60 लाख की राशि को राजसात करने का निर्देश दिया। राशि को ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स की व्यापार विहार ब्रांच में टीडीआर नंबर 1745759 से जमा किया गया था। इस दरमियान उनका ट्रांसफर भी हो गया। विभाग में आए वर्तमान ईई मधेश्वर प्रसाद ने 6 जून 2016 काे राजसात की हुई राशि को संबंधित फार्म को जारी करने का निर्देश जारी कर दिया। गुपचुप तरीके से जारी हुई राशि ठेकेदार को मिल गई और इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी। हालांकि अफसर इस बात से इनकार कर रहे हैं। मामले की जानकारी किसी भी बड़े अधिकारी को नहीं दी गई है और ऐसा करने से अधिकारियों पर कमीशनखोरी के आरोप लग रहे हैं।

निर्माण से जुड़े इन पांच मामलों से समझिए, किस हद तक गड़बड़ी

1. जीएसबी मटेरियल में गफलत, कार्रवाई नहीं

मुंगेली-पथरिया मार्ग पर टू लेन रोड का निर्माण कुछ समय पहले किया गया था। जीएसबी मटेरियल में गड़बड़ी हुई थी। ठेकेदार ने मिक्स जीएसबी मिलाकर डालीा। इसकी जांच पूर्व सीई वीके भतपहरी ने की थी और पूरा मटेरियल उखड़वाया था। इस मामले का भी अब तक कुछ नहीं हुआ।

4. रोड बनाने में लापरवाही पर जब्त हुई एफआडीआर, अब तक ठंडी है जांच

कुछ समय पहले सीपत बलौदा मार्ग पर बनी सड़क में जीएसबी में चार इंच की मात्रा कम मिली थी। अफसरों ने जांच की और ठेकेदार के कम फिलिंग करना पाया गया। वर्तमान में डिवीजन वन के ईई मधेश्वर प्रसाद ने ठेकेदार की एफडीआर भी जब्त कर ली थी। जिसकी शिकायत ठेकेदार ने सीई से की थी।

ऐसे हुआ खुलासा

दैनिक भास्कर रिपोर्टर को लोक निर्माण विभाग की वह नोटशीट मिली, जिसमें इन सारी बातों का उल्लेख है। इसमें साफ तौर लिखा गया है कि टीडीआर सेंट टू ब्रांच मैनेजर ओबीसी व्यापार विहार बिलासपुर फॉर इन केशमेंट नोट टू नंबर 4525 एट 6.6.2016 । विभाग के इस दस्तावेज पर ईई के हस्ताक्षर भी हैं। इसके बावजूद वे मामले इनकार कर रहे हैं। पहले भी यहां गड़बड़ी के ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। कइयों में जांच भी चल रही है।

2. छत्तीस टेंडर घोटाले की जांच का पता नहीं

पिछले विधानसभा चुनाव के पूर्व छत्तीस टेंडर का घोटाला सामने आया था। इसे भी पूर्व कार्यपालन अभियंता ने करवाया। बड़े अधिकारियों का नाम फंसने के बाद मामले में जांच जारी है। अभी तक किसी पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। आरोप है कि जांच की फाइल दबा दी गई । जांच अधिकारी पूर्व सीई वीके भतपहरी थे। वे फिलहाल कुछ नहीं कह रहे।

विभाग की नोटशीट से पकड़ाई गलती।

सीधी बात

सीपत बेलतरा सड़क निर्माण की राजसात की राशि जारी कर दी गई?

- आप कौन से मामले की राजसात की राशि की बात कर रहे हैं।

सीपत बेलतरा सड़क निर्माण के उन्नयन व चौड़ीकरण की 60 लाख की राजसात की राशि का मामला?

- वह राशि तो जमा है?

जानकारी मिली है कि आपने वह राशि संबंधित फर्म को जारी कर दी है?

- जानकारी सही नहीं है। राशि अभी भी जमा है।

बहतराई स्टेडियम मामले में 2.81 लाख की राशि पूर्व दो ईई और डीए ने मिलीभगत कर खर्च की। इस मामले में सीई और एसी का कहना है कि हमने उन्हें नाेटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। अफसरों का कहना है कि हमने लिखकर दे दिया है लेकिन अफसर इसके आगे बताने को कुछ तैयार नहीं हैं।

5. 2.81 करोड़ की राशि खर्च कर दी अफसरों ने, मांगा गया है स्पष्टीकरण

मधेश्वर प्रसाद, ईई, डिवीजन वन पीडब्ल्यूडी

मैंने सही वक्त पर किया रोड का काम

3. पौने दो करोड़ की रायल्टी भी चोरी

रायल्टी चोरी मामले में पौने दो करोड़ की रायल्टी चोरी कर सरकारी पैसों का नुकसान किया गया। इस मामले में विभाग के अफसरों ने सिर्फ एक बाबू को निलंबन कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं की। कार्रवाई के सवाल पर हर बार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे।

मामले में ठेकेदार अतुल शुक्ला का कहना है कि 15 जनवरी 2017 को सीपत बेलतरा की परफार्मेंस गारंटी खत्म हुए एक साल हो गया है। उन्होंने परफार्मेंस गारंटी रहते मुझसे रिपेयर करा लिया है और एसडीओ ने भी सर्टिफिकेट दे दिया है कि समय रहते मैंने अपना काम पूरा कर लिया है। मेरी राशि राजसात करने के बाद मुझे बिल के रूप में भुगतान की गई है।

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