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एसआईटी बोली- लोकायोग से मतलब नहीं, जांच जारी

3 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में फर्जी भर्ती मामले पर जांच करने वाली एसआईटी भी रिकॉर्ड में उलझ गई है। अभी तक उन्हें सिम्स से पूरे दस्तावेज नहीं मिले हैं। इसके चलते कमेटी के मेंबरों ने इसका अध्ययन भी नहीं किया है। एसआईटी प्रमुख टंडन का कहना है कि उन्हें लोकायोग की टाइम लिमिटेशन ने मतलब नहीं है। सरकार ने उन्हें इसके लिए नियुक्त किया है। जब भी जांच पूरी होगी वे इसका जवाब शासन को देंगे। समय पर जांच पूरी करने की बात पर उनका कहना है कि इसके लिए टाइम भी बढ़वाया जा सकता है।

इससे पहले भी सिम्स के जिम्मेदारों ने जांच के नाम पर अफसरों को गुमराह किया है। इस वजह से 6 साल बाद भी लोक आयोग किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका है। स्पेशल इंवेस्टिगेशन मामले में तीसरी जांच कर रहा है। इससे पहले सिम्स के सीनियर डॉक्टर, फिर कलेक्टर। दोनों ने अपनी रिपोर्ट भी भेज दी है। दस्तावेजों में कई तरह की गड़बड़ी के चलते हर बार मामला जांच तक सीमित होकर रह गया है। गौरतलब है कि सिम्स में साल 2012-13 के दौरान सिम्स महाविद्यालय व चिकित्सालय में 400 पदों की भर्ती की गई। इस दौरान प्रबंधन ने चार कमेटी गठित कर इसके सदस्यों को भर्ती का जिम्मा दिया गया। कमेटी के सदस्यों ने मिलकर कर्मचारियों की भर्ती में खुलेआम गड़बड़ी की। यहां तक कि कमेटियों ने सिम्स में सालों से संविदा के पद पर काम करने वाले कर्मचारियों को अयोग्य घोषित करते हुए अपूर्ण आवेदन पत्र जमा करने वाले कर्मचारियों को नौकरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भर्ती प्रक्रिया पूरा होने के कुछ दिनों बाद संविदा में कार्यरत व शिकायतकर्ता किशन निर्मलकर व संजीव पांडल ने भर्ती में हुए गड़बड़ी का खुलासा किया। तब से अभी तक शासन के निर्देश पर जांच चल रही है। इसके लिए तीन कमेटी गठित हो चुकी है। सबसे पहले कलेक्टर द्वारा जांच करवाई गई थी।

सिम्स में भर्ती घोटाला

शिकायतकर्ता का

हो चुका है बयान

मामले में शिकायतकर्ता संजीव पांडाल का बयान दर्ज कर लिया गया है। एसआईटी मेंबर ने पहली बार सिम्स दौरे के दौरान ही उन्हें बुलवाया था। उन्होंने अफसरों को थैले भर के सबूत दिए हैं। इसके बाद से अब तक कोई एक महीना गुजरने को पर टीम मेंबरों ने दोबारा अस्पताल का निरीक्षण नहीं किया गया है।

सीधी बात

आरके टंडन, एसआईटी प्रमुख

सिम्स में चल रही जांच कहां तक पहुंची है?

-अभी दस्तावेज की जांच कर रहे हैं।

रिकॉर्ड से आगे अभी किसी तरह की कोई जांच नहीं हुई? क्या इसका अवलोकन किया गया है?

- नहीं अभी दस्तावेजों का कोई अवलोकन नहीं किया गया है।

लोकायोग ने मामले में जांच के लिए डेड लाइन तय की है, ऐसे में कब तक नतीजे तक पहुंचा जा सकेगा। दोषियों को कैसे सजा मिलेगी?

- हमें लोकायोग से कोई मतलब नहीं है। हमें सरकार को अपनी रिपोर्ट देनी है। रही बात टाइम की तो ये बढ़ जाएगा।

जांच को लेकर किसी तरह का कोई दबाव तो नहीं है?

- नहीं। मामले में किसी तरह का कोई दबाव नहीं है।

जांच पूरा होने की कब तक उम्मीद है?

- जांच तो जांच की तरह होती है। जब होगा पता चल जाएगा।

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